लोक संस्कृति का रंगीन मंच
रायपुर/जगदलपुर।
प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय भरथरी गायिका सुरुज बाई खांडे की जयंती के उपलक्ष्य में 12 जून को बस्तर चेम्बर ऑफ कॉमर्स हाल में ‘सुरुज उत्सव’ का भव्य आयोजन हुआ। इस आयोजन में बस्तर और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने वाले अनेक कलाकारों, पत्रकारों और समाजसेवियों को ‘सुरुज सम्मान 2025’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत शिवकुमार नाग द्वारा प्रस्तुत ‘बस्तर वंदना गीत’ से हुई, इसके बाद मोहरी वाले ग्रुप ने ‘दंतेश्वरी पाड़’ की अनूठी प्रस्तुति दी। चित्रकार खेमदास वैष्णव व सुभाष पांडेय द्वारा बस्तर लोकचित्रों की प्रदर्शनी भी आयोजन स्थल पर लगाई गई।

किताब विमोचन ने बढ़ाई गरिमा
इस अवसर पर मेघ प्रकाश शेरपा द्वारा लिखित पुस्तक ‘ईरुम मांड का द्वंद व प्रेम’ का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक बस्तर के अनुभवों पर आधारित है।
सांस्कृतिक समर्पण के सूत्रधार
कार्यक्रम का संचालन अफजल अली ने किया और भरथरी लोकगायिका हिमानी वासनिक ने भरथरी गायन की मधुर प्रस्तुति दी। सुरुज ट्रस्ट की दीप्ति ओग्रे ने बताया कि इस वर्ष बिलासपुर, रायपुर संभाग के बाद बस्तर संभाग के लोगों को सुरुज सम्मान देने की योजना बनाई गई थी। उन्होंने कहा, “हम हर वर्ष सुरुज बाई खांडे की जयंती व पुण्यतिथि पर भरथरी गायन का प्रचार करते हैं ताकि यह विधा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे।”
शकील रिजवी ने कहा कि “हम सुरुज उत्सव के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच देने के लिए कार्यरत हैं।”
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एस. करीमुद्दीन व अध्यक्षता खेमदास वैष्णव ने की, साथ ही विशिष्ट अतिथि डॉ. जयमती कश्यप व अनिल लुंकड़ रहे। उनके करकमलों से जिन विभूतियों को सुरुज सम्मान 2025 प्रदान किया गया, वे निम्न हैं:
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पत्रकारिता: विकास तिवारी, गायत्री आचार्य
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साहित्य: खुदैजा खान, विक्रम सोनी
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समाज सेवा: प्रकाश ठक्कर
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महिला आर्थिक उन्नयन: रजिया शेख
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अभिनय: मोहन सोनी, खुशबू सोढ़ी
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लोक गायन: शिव कुमार नाग, पिलादास कोर्राम
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वादन: जयप्रकाश
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पर्यटन: उर्मिला नाग, मानसिंह भघेल
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सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर: कविता कश्यप, अस्तु नाग
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चित्रकला: सुरभि वर्मा, जगदीश तिवारी
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समूह: चित्र विचित्र ग्रुप, मोहरी वाले ग्रुप
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सुरक्षा बल: सैनिक करन राय
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मंच संचालन: अफज़ल अली
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घड़वा शिल्प: महेश सागर, उर्मिला सागर









