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रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल में कुल 140 हाथियों का विचरण
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हाथियों के हमले से फसलों को भारी नुकसान
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हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी के उपाय
रायगढ़। रायगढ़ और धरमजयगढ़ जिले के दो वन मंडलों में कुल 140 हाथी विचरण कर रहे हैं। शाम के समय जंगल से बाहर आकर ये हाथी गांवों तक पहुंच जाते हैं, जिससे ग्रामीणों के बीच चिंता और भय का माहौल उत्पन्न हो गया है। हाथियों के गांवों में घुसने से धान की फसलों को भी नुकसान हो रहा है। बीती रात धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों ने करीब 19 स्थानों पर फसलों को नुकसान पहुँचाया, जिनमें छाल रेंज के बनहर बीट अंर्तगत चुहकीमार गांव सबसे अधिक प्रभावित हुआ। यहां 13 किसानों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल और धरमजयगढ़ रेंज में हाथियों की सबसे अधिक संख्या देखी जा रही है। वर्तमान में लैलूंगा के मुकेडगा में 22 हाथी और छाल रेंज के बनहर में 16 हाथी मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, छाल में 12 और कापू में 11 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। रायगढ़ के तमनार रेंज के छिरवानी बीट में भी 21 हाथी देखे गए हैं। जिले के दोनों वन मंडलों में कुल मिलाकर 34 शावक भी हैं। धरमजयगढ़ वन मंडल में 30 नर, 51 मादा और 23 शावक हैं, जबकि रायगढ़ वन मंडल में 7 नर, 17 मादा और 11 शावक हाथी विचरण कर रहे हैं।
बुधवार की रात को धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। कुड़ेकेला में हाथियों ने 20 फेंसिंग पोल तोड़ दिए, जबकि आमगांव में बोर और फसल, बायसी में 2 किसानों की मक्का, केला और कटहल की फसलों को नुकसान पहुंचाया। पोटिया में आरडीएफ की झोपड़ी और सूचना बोर्ड को भी हाथियों ने तोड़ दिया।
हाथी प्रभावित गांवों में ग्रामीण रातभर जागकर हाथियों को जंगल की ओर भगाने का प्रयास करते हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि हाथियों की निगरानी के लिए हर दल के पीछे दो ट्रैकर तैनात हैं। हाथी मित्र दल भी उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं और आवश्यकतानुसार ड्रोन कैमरे का सहारा लिया जा रहा है। एसडीओ एमएल सिदार ने बताया कि धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की संख्या बढ़ी है और सभी दलों पर निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित गांवों में सुरक्षा के लिए मुनादी करवाई जा रही है और ग्रामीणों को जंगल में अकेले जाने से रोका जा रहा है।






