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ग्राम करंजाभिलाई में श्रीराम कथा का आयोजन, हजारों श्रद्धालु हुए धन्य

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ननकट्ठी (रोहितास सिंह भुवाल)।

समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से ग्राम करंजाभिलाई में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित युवराज पाण्डेय, श्री जगन्नाथ मंदिर अमलीपदर, गरियाबंद द्वारा 11 से 17 जनवरी तक श्रीराम कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा के पहले दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें विभिन्न गांवों और शहरों से आईं महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 

पीले परिधान में सजी महिलाएं सिर पर नारियल और फूलों से सुसज्जित कलश लेकर, कथा स्थल से गांव के मुख्य मार्ग होते हुए कथा स्थल तक पहुंचीं। यात्रा में पुरुषों और बच्चों ने श्रीराम ध्वज थामे जय श्रीराम के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय कर दिया। हजारों श्रद्धालु इस भव्य यात्रा का हिस्सा बने और धार्मिक उल्लास से सराबोर हो गए।

कथावाचक पंडित युवराज पाण्डेय ने श्रीराम कथा के पहले दिन अपने प्रवचन में तुलसीदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और राम कृपा के बिना यह विवेक सुलभ नहीं है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन में सत्संग का महत्व समझेगा, तभी प्रभु श्रीराम की कृपा उस पर बरसेगी।

तुलसीदास के जीवन प्रसंग का उल्लेख
कथा के दौरान पंडित युवराज पाण्डेय ने तुलसीदास के जीवन के एक महत्वपूर्ण प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि तुलसीदास की पत्नी रत्नावली के प्रति उनके अत्यधिक प्रेम ने उनके जीवन को कैसे बदला। एक बार जब रत्नावली अपने मायके गईं, तो तुलसीदास उन्हें देखने की व्याकुलता में तूफान और उफनती नदी को पार कर गए।

उन्होंने नदी पार करने के लिए एक लाश का सहारा लिया और सांप की पूंछ को रस्सी समझकर खिड़की से कक्ष में प्रवेश किया। इस घटना से नाराज रत्नावली ने तुलसीदास से कहा, “यदि यह प्रेम श्रीराम से किया होता, तो तुम्हारा जीवन सफल हो जाता।” पत्नी की इस बात ने तुलसीदास के हृदय को झकझोर दिया और उसी क्षण से वे भगवान श्रीराम की भक्ति में लीन हो गए। आगे चलकर उन्होंने रामचरित मानस की रचना कर दी।

इस दौरान, कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु तुलसीदास के इस प्रेरक प्रसंग को सुनकर भाव-विभोर हो गए।

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