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दुगली वन धन केंद्र की महिलाओं ने रचा इतिहास, 4.37 करोड़ तक पहुंचा कारोबार

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धमतरी। 

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का दुगली वन धन विकास केंद्र आज आदिवासी महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा मॉडल बनकर उभरा है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूती दे रहा है। वर्तमान में यहां 10 महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी है। ये महिलाएं पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संगम से लगभग 25 प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार कर रही हैं।

4.37 करोड़ का भारी-भरकम कारोबार

प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना ने आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका के नए द्वार खोल दिए हैं। दुगली केंद्र की महिलाओं ने वनोपज का मूल्य संवर्धन कर अपनी आय में कई गुना बढ़ोतरी की है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के सहयोग से इस केंद्र ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक इस केंद्र ने लगभग 4.37 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। आधुनिक प्रशिक्षण और मशीनरी ने इन महिलाओं की मेहनत को प्रोफेशनल रंग दे दिया है।

रंभा टेकाम बोलीं- अब मेहनत का मिल रहा सही दाम

केंद्र की सदस्य कु. रंभा टेकाम ने बताया कि वन धन विकास केंद्र से जुड़ने के बाद महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब महिलाएं केवल कच्ची वन उपज नहीं बेचतीं, बल्कि उसका प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन भी खुद कर रही हैं। रंभा के मुताबिक, प्रशिक्षण मिलने के बाद अब वे विभिन्न उत्पाद तैयार करने में सक्षम हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधरी है और वे अपने परिवारों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

दिल्ली से मिला राष्ट्रीय स्तर का सम्मान

दुगली वन धन विकास केंद्र की गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है। वर्ष 2021 में केंद्र को उसके उत्कृष्ट कार्यों के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। यह केंद्र अब स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का एक बड़ा प्रेरक उदाहरण बन गया है। योजना की सफलता बताती है कि जब सरकारी मदद और जनभागीदारी मिलती है, तो पूरे समाज की आर्थिक तस्वीर बदल जाती है।

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