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दुर्ग में ‘सफाई कर्मचारी दिवस’ पर गरजे कामगार: बोले- ‘अब और नहीं सहेंगे शोषण’

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  •  दुर्ग में नगरीय निकाय जनवादी सफाई कामगार यूनियन ने सफाई कर्मचारी दिवस पर निकाली रैली ।

 

दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।

31 जुलाई 2025 को सफाई कर्मचारी दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले के सभी नगरीय निकायों के सफाई कर्मचारी नगरीय निकाय जनवादी सफाई कामगार यूनियन छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति जिला दुर्ग छत्तीसगढ़ के बैनर तले एकजुट हुए। अपनी लंबित मांगों और बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे इन कामगारों ने शहर में एक विशाल रैली निकाली, सभा की और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

 

हक और सम्मान की लड़ाई

शहर की साफ-सफाई सुनिश्चित करने वाले ये कामगार लंबे समय से अपनी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। सफाई कर्मचारी दिवस उनके लिए केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि अपनी एकजुटता और न्याय के लिए संकल्प का दिन बन गया। वे बेहतर कामकाजी परिस्थितियों और सम्मानजनक जीवन जीने के हक के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं।

प्रमुख मांगें और चुनौतियां

सफाई कर्मचारियों ने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें और समस्याओं को रखा। उनकी प्रमुख मांगों में सबसे ऊपर है ठेका प्रणाली को समाप्त कर सभी संविदा सफाई कर्मचारियों का नियमितीकरण। इसके साथ ही, उन्होंने सभी सफाई कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक 26000 रुपए न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते में वृद्धि की मांग की है। श्रम कोड कानून वापस लेने और राज्य सफाई कामगार आयोग का गठन भी उनकी मुख्य मांगों में शामिल है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से, कर्मचारियों ने काम के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरण (मास्क, दस्ताने, जूते आदि) नियमित रूप से उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य जांच की सुविधा प्रदान करने पर जोर दिया। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, उपादान और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। पदोन्नति के अवसरों की कमी और मैनुअल स्कैवेजिंग को पूरी तरह समाप्त कर आधुनिक मशीनों और उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया।

सफाई कर्मचारियों ने अपनी गंभीर समस्याओं को भी सामने रखा। इनमें बिना उचित सुरक्षा उपकरणों के सीवर और कचरे की सफाई के कारण असुरक्षित कार्य वातावरण, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम होते हैं, प्रमुख है। ठेकेदारों द्वारा वेतन में कटौती और समय पर भुगतान न करने से शोषण और कम वेतन एक बड़ी समस्या बनी हुई है। समाज में उनके योगदान को अक्सर कम आंका जाता है और उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। दूषित वातावरण में काम करने के कारण त्वचा रोग, श्वसन संबंधी बीमारियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ आम हैं, वहीं उनके लिए बनी कई सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक नहीं पहुँच पाता।

‘मांगे अनसुनी होने पर किया जायेगा बड़ा आंदोलन’

नगरीय निकाय जनवादी सफाई कामगार यूनियन के प्रतिनिधियों ने कहा, “हम लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हमारी आवाज को अनसुना किया जा रहा है। 31 जुलाई सफाई कर्मचारी दिवस सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारी एकजुटता और न्याय के लिए हमारे संकल्प का दिन है।” यूनियन ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि वे सफाई कर्मचारियों की इन जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करें और उन्हें जल्द से जल्द पूरा करें ताकि वे भी सम्मानजनक जीवन जी सकें और देश के विकास में अपना योगदान जारी रख सकें। यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इस प्रदर्शन में कलादास डहरिया, रमाकांत बंजारे, लक्ष्मण साहू, अरिम शिवारे, पंवराम, महेश्वर, महेश साहू, मनोज कोसरे, मैरी, निरा डहरिया, गौतम भारती, खेमीन साहू सहित सैकड़ों सफाई कामगार उपस्थित थे। यह जानकारी महासचिव मनोज कोसरे ने दी।

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