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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में की घोषणा, शुद्ध इथेनॉल से जुड़े नियमों और रेगुलेशंस की फाइल पर किए हस्ताक्षर।
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टोयोटा, सुजुकी, MG और हुंडई जैसी दिग्गज कंपनियां जल्द बाजार में उतारेंगी इथेनॉल से चलने वाले वाहन।
नागपुर (ओम दर्पण न्यूज)।
केंद्र सरकार ने देश में 100% शुद्ध इथेनॉल को बतौर ईंधन इस्तेमाल करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी साझा की। गडकरी ने बताया कि उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय से संबंधित नियमों और रेगुलेशंस को अंतिम रूप देने वाली फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण रोकना मुख्य लक्ष्य
इस कदम का प्राथमिक उद्देश्य देश की कच्चे तेल (फॉसिल फ्यूल) के आयात पर बढ़ती निर्भरता को कम करना है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट सेक्टर से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाना भी सरकार की प्राथमिकता है। नितिन गडकरी ने जोर देकर कहा कि इथेनॉल पेट्रोल के मुकाबले एक किफायती और टिकाऊ विकल्प साबित हो सकता है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से क्रूड ऑयल आयात करके पूरा करता है, जिससे राजकोष पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। 100% इथेनॉल के उपयोग से आम जनता को महंगे पेट्रोल से राहत मिलेगी और भारत का ईंधन आयात बिल भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
6 हफ्तों के भीतर लॉन्च होंगे नए वाहन
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर ने इस बदलाव को सहर्ष स्वीकार कर लिया है। कई बड़ी कंपनियां 100% इथेनॉल से चलने वाले वाहन बाजार में उतारने के लिए तैयार हैं। गडकरी ने बताया कि टोयोटा, सुजुकी, MG और हुंडई सहित अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियां अगले 6 हफ्तों के भीतर भारतीय बाजार में अपने ऐसे नए मॉडल्स लॉन्च करने जा रही हैं जो पूरी तरह इथेनॉल पर संचालित होंगे।
इथेनॉल का उत्पादन और इसके प्रकार
इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों जैसे स्टार्च युक्त पदार्थों से भी इसे बनाया जा सकता है। इसके उत्पादन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल: यह गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठा ज्वार और मक्का से तैयार होता है। सेकेंड जनरेशन एथेनॉल: इसके निर्माण में सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब (भुट्टा), बांस और वुडी बायोमास का उपयोग होता है। थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल: इसे एलगी (शैवाल) से बनाया जाएगा, जिस पर वर्तमान में शोध कार्य जारी है।
E85 ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक
सरकार ने पिछले हफ्ते ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन पेश किया था, जिसमें 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल का मिश्रण होता है। दिल्ली में E85 ईंधन की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर तय की गई है, जो रेगुलर E20 पेट्रोल से 20 रुपये कम है। वर्तमान में बाजार में 4 तरह के फ्लेक्स-फ्यूल उपलब्ध हैं।
केवल फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में होगा इस्तेमाल
E85 या E100 ईंधन का उपयोग सामान्य पेट्रोल इंजन वाली गाड़ियों में नहीं किया जा सकता; इसके लिए गाड़ियों का इंजन ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ तकनीक पर आधारित होना अनिवार्य है। मारुति सुजुकी वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल भारत की पहली पैसेंजर कार है जो 100% एथेनॉल (E100) ब्लेंड तक चलने में सक्षम है। दोपहिया वाहनों में हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर+ और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किए हैं जो E20 से E85 तक के ईंधन पर चल सकते हैं। इनकी बिक्री दिल्ली और महाराष्ट्र में जुलाई 2026 से शुरू होगी। इसके अलावा सुजुकी जिक्सर SF भी हाई-एथेनॉल फ्यूल सपोर्ट करने वाली श्रेणी में शामिल है।









