- सरगुजा के हसदेव अरंड में पुलिस बल तैनात, ग्रामीणों ने किया गिरफ्तारी का आरोप
अंबिकापुर (पंकज शुक्ला)।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के जैव विविधता से भरपूर हसदेव अरंड क्षेत्र में शुक्रवार को परसा ईस्ट और केते बासेन (पीईकेबी) चरण-दो कोयला खदान के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो गई। इस खनन परियोजना का स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि 100 से अधिक लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है, जबकि पुलिस प्रशासन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें अन्यत्र भेजा गया है ताकि कटाई कार्य में व्यवधान न हो।
वन विभाग द्वारा जारी बयान में बताया गया कि 74.130 हेक्टेयर वन भूमि में 10,944 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है, जिसमें से 32 हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पहले ही शुरू हो चुकी है। अब तक 3,694 पेड़ काटे जा चुके हैं और शेष पेड़ों की कटाई का कार्य जारी है। यह क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध होने के साथ-साथ आदिवासी समुदायों का निवास भी है, जिसके कारण यहां के लोग लंबे समय से इस खनन परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
हसदेव अरंड बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण कई वर्षों से खदानों के आवंटन का विरोध कर रहे हैं। आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने इस कटाई को राज्य सरकार की आदिवासी विरोधी नीति करार देते हुए कहा कि यह कदम आदिवासी समुदायों के अधिकारों को छीनने के समान है।
पुलिस का बयान: हिरासत में नहीं, स्थानांतरित किए गए
सरगुजा के पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने बताया कि किसी भी ग्रामीण को हिरासत में नहीं लिया गया है, बल्कि उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित किया गया है ताकि पेड़ों की कटाई के दौरान कोई व्यवधान न हो। उन्होंने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि सुरक्षा बलों की तैनाती केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई है।











