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दुर्ग में आयोजित राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी: पर्यावरण और संधारणीय विकास पर गहन चर्चा

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दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।

शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भूगोल विभाग एवं छत्तीसगढ़ भूगोल परिवार द्वारा “लोग, पर्यावरण एवं संधारणीय विकास” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ल ने अपने संबोधन में पर्यावरण के प्रति सभी की जिम्मेदारी को समझने और अनुशासित जीवन अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें हर कार्य राष्ट्रहित में करना चाहिए, क्योंकि राष्ट्र सर्वोपरि है।

सत्र के प्रमुख वक्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रोफेसर सुरेश चंद राय ने अपनी की नोट एड्रेस में बढ़ते नगरीकरण से उत्पन्न समस्याओं और उनके संभावित समाधान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान नगरीकरण की सोच में बदलाव से करने पर जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि, हरिसिंग गौर विश्वविद्यालय सागर के प्रोफेसर कमल शर्मा ने संधारणीय विकास की अवधारणा को सरल शब्दों, चित्रों और सुंदर उदाहरणों से समझाया। उन्होंने लोगों, पर्यावरण और विकास के सहजीवी संबंध पर जोर दिया और बढ़ती जनसंख्या तथा निरंतर विकसित हो रही तकनीक से उत्पन्न समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम.ए. सिद्दीकी ने अपने उद्बोधन में भूगोल विषय की व्यापकता और अन्य विषयों से उसके संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने भूगोल विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी को सभी विषयों के शिक्षकों के लिए उपयोगी बताते हुए भूगोल विभाग को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि इस दो दिवसीय संगोष्ठी में राज्य सहित देश के विभिन्न राज्यों जैसे गोवा, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार से 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया। पहले दिन 27 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जो संगोष्ठी की सफलता का संकेत है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रतिभागियों, महाविद्यालय के प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

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