

लखनऊ।
सनातन धर्म के सबसे बड़े आयोजन महाकुंभ के लिए केंद्र सरकार से इस बार अब तक का सबसे बड़ा पैकेज मिलने की संभावना है। महाकुंभ आयोजन को लेकर 14 नवंबर को होने वाली अहम बैठक में केंद्र सरकार की ओर से धनराशि तय की जा सकती है। वर्ष 2019 में हुए कुंभ मेले के लिए केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को 1200 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की थी, जबकि इस बार 2000 करोड़ रुपये से अधिक के अनुदान की उम्मीद जताई जा रही है। राज्य सरकार ने महाकुंभ आयोजन के लिए पहले ही 5400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
महाकुंभ 2025 में कुल अनुमानित खर्च करीब 7000 करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है। इसमें से 5400 करोड़ रुपये महाकुंभ आयोजन पर प्रत्यक्ष रूप से खर्च होंगे और शेष 1600 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों के बजट से आच्छादित किए जाएंगे। वर्ष 2019 के कुंभ आयोजन पर कुल 2406 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जिसमें से 1200 करोड़ रुपये का योगदान केंद्र सरकार द्वारा दिया गया था। इससे पहले, 2013 में आयोजित महाकुंभ के लिए केंद्र ने 1142 करोड़ रुपये दिए थे।
धनराशि आवंटन पर मंथन जारी
नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात के अनुसार, केंद्र सरकार में महाकुंभ आयोजन के मद्देनजर धनराशि आवंटन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। 14 नवंबर को होने वाली इस बैठक में महाकुंभ के लिए आवंटित होने वाली राशि का निर्धारण किया जाएगा। इस बार पिछले कुंभ के मुकाबले दोगुनी राशि मिलने की संभावनाएं हैं।
इसके अलावा, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय महाकुंभ के लिए छह लेन का गंगा ब्रिज बना रहा है, जिसे 15 दिसंबर तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। दूरसंचार मंत्रालय भी मेला क्षेत्र और आसपास के शहरों में 315 दूरसंचार टावर लगाने में जुटा है, ताकि मेले के दौरान संचार सुविधाएं बेहतर बनाई जा सकें। अन्य विभाग भी क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।





