भिलाई (रवि कुमार भास्कर)।

नेहरू नगर भेलवा तालाब, नगर पाली निगम भिलाई क्षेत्र में आज बलिदान दिवस मनाया गया, जहां अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को याद किया गया। इस मौके पर युवाओं को उनके अद्वितीय साहस और देशप्रेम के बारे में बताया गया, जो अपनी कम उम्र में फांसी के तख्ते पर झूल गए, लेकिन कभी अपनी आज़ादी की लड़ाई से पीछे नहीं हटे।
निगम भिलाई के जनसंपर्क अधिकारी अजय शुक्ला ने बताया कि 24 मार्च 1931 को फांसी दी जानी थी, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने डर के मारे रात 2 बजे 23 मार्च को इन्हें फांसी दी थी। जेल मैन्युअल के मुताबिक रात में किसी को फांसी नहीं दी जा सकती थी, लेकिन अंग्रेजों ने नियमों को नकारते हुए शहीदों को छिपकर फांसी दे डाली। जब जेल के बाहर लोग इनकी फांसी रुकवाने के लिए आवाज़ उठा रहे थे, अंग्रेज अधिकारी अपनी कायरता को छिपाते हुए शवों को कचरे के गाड़ी में छिपाकर रावी नदी के तट पर अंतिम संस्कार करने ले गए।
भारत विकास परिषद के सचिव जितेंद्र सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हम सबका कर्तव्य है महापुरुषों को याद करें और उनके बलिदानों को समाज तक पहुंचाएं। वहीं, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कहा कि शहीदों की प्रेरणा हमें कठिन परिस्थितियों में भी अपने देश के प्रति प्यार और समर्पण बनाए रखने की शिक्षा देती है।
परिचर्चा में डोमार सिंह राजपूत, तेजस त्रिपाठी, पंकज कुमार इलाहाबादी, श्री पुरंग, दयानंद चिट्टा, रानी बोई, खुशी ग्वालियर, ऋतिक श्रीवास्तव, अनुराग, उद्योगपति सुभाष गुलाटी, डॉक्टर नवीन कौरा, सुबोध अग्रवाल, तुलसी भमवानी, हरदयाल सिंह, श्री चतुर्वेदी, डॉ ललित पोपट, प्रदीप डालमिया, संजय भाटिया जैसे गणमान्य लोग भी शामिल हुए।









