रायपुर/नई दिल्ली:
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला, शराब और जिला खनिज न्यास (DMF) घोटाले में मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान कर दी है। इस फैसले के बाद, जो पिछले तीन वर्षों से रायपुर जेल में बंद थे, उनके बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

तीन साल बाद मिली अंतरिम राहत
सूर्यकांत तिवारी को मंगलवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जाय माला बागची की डबल बेंच ने यह आदेश पारित किया। वह छत्तीसगढ़ के कोयला परिवहन घोटाले, शराब घोटाले और डीएमएफ फंड में हुए घोटाले में प्रमुख रूप से आरोपित थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इन मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग की धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था और तब से वह रायपुर केंद्रीय जेल में न्यायिक अभिरक्षा में थे।

सुप्रीम कोर्ट में जोरदार पैरवी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सूर्यकांत तिवारी की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, शशांक मिश्रा और तुषार गिरी ने जोरदार पैरवी की। उनकी दलीलों के बाद ही अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस आदेश ने उनके समर्थकों में खुशी की लहर पैदा कर दी है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है और इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख बाद में निर्धारित की जाएगी। यह फैसला न केवल सूर्यकांत तिवारी के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की गहन समीक्षा कर रहा है। आने वाले दिनों में मामले में स्थायी जमानत या अन्य कानूनी विकल्पों को लेकर भी सुनवाई की संभावना है।









