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बीजेपी ने भगवंत मान सरकार पर बाढ़ प्रबंधन में विफलता की “चार्जशीट” की पेश — पंजाब में ग्रामीण जनसंपर्क की नई सियासी पारी शुरू

चंडीगढ़ में बीजेपी नेताओं द्वारा भगवंत मान सरकार के खिलाफ बाढ़ प्रबंधन को लेकर चार्जशीट जारी करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस।
बीजेपी कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने चंडीगढ़ में “चार्जशीट” जारी करते हुए आप सरकार पर शासन और जवाबदेही में नाकामी का आरोप लगाया।

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चंडीगढ़।

पंजाब में सियासी हलचल एक बार फिर तेज़ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मंगलवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ हालिया बाढ़ प्रबंधन को लेकर “शासन, तैयारी और जवाबदेही की भारी नाकामी” का आरोप लगाते हुए एक “चार्जशीट” दाखिल की।

यह दस्तावेज़ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं बल्कि पार्टी की “ग्रामीण संपर्क” रणनीति का हिस्सा है, जिसके ज़रिए बीजेपी उन इलाकों में अपनी पैठ मज़बूत करना चाहती है, जहां अब तक उसका प्रभाव सीमित रहा है।


आप सरकार पर तीखे आरोप

राज्य के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने चार्जशीट जारी करते हुए कहा कि पंजाब सरकार चेतावनियों और विशेषज्ञों की रिपोर्टों के बावजूद अपने लोगों की सुरक्षा में असफल रही।
उन्होंने कहा, “2023 की बाढ़ से कोई सबक नहीं लिया गया। कोई जांच पूरी नहीं हुई और अहम सिफारिशों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। मुख्यमंत्री उस समय राज्य से बाहर थे जब पंजाब पानी में डूब रहा था।”

बीजेपी ने आरोप लगाया कि मान सरकार ने राहत फंड के मुद्दे पर भी भ्रम फैलाया। पार्टी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा था कि केंद्र ने 12,000 करोड़ रुपये का राहत फंड जारी किया, जबकि राज्य सरकार ने इसे झुठला दिया।


समानांतर सत्र और सियासी रणनीति

बाढ़ पर बुलाए गए विशेष विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी ने चंडीगढ़ दफ़्तर में समानांतर सत्र आयोजित कर सरकार को आपदा तैयारियों में विफल बताया।
राजनीति विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. कंवलप्रीत कौर (DAV कॉलेज, सेक्टर-10) के अनुसार, बीजेपी अब बाढ़ प्रभावित इलाकों में अपनी मौजूदगी मज़बूत कर रही है — यह किसानों से रिश्ते सुधारने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, “सिंघु बॉर्डर आंदोलन के दौरान किसानों से रिश्ते बिगड़े थे, अब पार्टी उसी दूरी को मिटाने की कोशिश कर रही है।”


ग्रामीण इलाकों में पैठ बनाने की कोशिश

बीजेपी प्रवक्ता विनीत जोशी ने कहा कि पार्टी ने ग्रामीण चुनौती से सीधा मुकाबला करने का निर्णय लिया है।
उनके अनुसार, “हम पहले से ही शहरी इलाकों में मजबूत हैं, अब गांवों में भी कार्यकर्ता सक्रिय हैं। बाढ़ के दौरान हमारे नेता जमीनी स्तर पर मदद कर रहे थे।”

मई में शुरू किए गए अभियान “बीजेपी दे सेवादार आ गए तुहाडे द्वार” के तहत पार्टी ने 50 विधानसभा क्षेत्रों के 1.57 लाख ग्रामीणों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा।

इस दौरान केंद्र की योजनाओं — किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ — से लाभार्थियों को जोड़ने का काम हुआ।


सरकार की प्रतिक्रिया और टकराव

अभियान की सफलता के बाद फाज़िल्का में बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ को हिरासत में लिया गया और कार्यक्रम रोक दिया गया।
बीजेपी प्रवक्ता अनिल सरीन ने कहा, “मान सरकार ने हमें इसलिए रोका क्योंकि हमारा अभियान बेहद सफल था। हमने 39 विधानसभा क्षेत्रों के 1,443 गांवों में कैंप पूरे किए थे।”

उन्होंने बताया कि अब बीजेपी के पास बूथ स्तर तक संगठनात्मक ढांचा तैयार है —

“हर मंडल का प्रमुख है, हर शक्ति केंद्र सक्रिय है, और गांवों में गुरुद्वारों से एलान तक किए जा रहे हैं।”


लोकसभा 2024 में बढ़त से मिला आत्मविश्वास

बीजेपी का वोट शेयर 2019 के 9.63% से बढ़कर 2024 में 18.5% हो गया — लगभग दोगुना।
विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी अब हरियाणा मॉडल को पंजाब में दोहराने की कोशिश में है।

डॉ. कंवलप्रीत कौर ने कहा, “लोकसभा चुनावों ने बीजेपी को विश्वास दिलाया है कि सही रणनीति पर टिके रहकर वह पंजाब में अपनी पकड़ बढ़ा सकती है।”

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