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शराब घोटाला: 4 तरीकों से लूटा खजाना; लखमा, चैतन्य समेत 81 पर ED का शिकंजा

Chhattisgarh Liquor Scam ED Complaint

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रायपुर |

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा और कस दिया है। ED ने 26 दिसंबर को मामले में एक और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कम्प्लेन (पूरक अभियोजन शिकायत) दायर की है। इस ताजा कार्रवाई ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

जांच एजेंसी ने खुलासा किया है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच आबकारी विभाग में एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था। इस सिंडिकेट ने शराब नीति में हेरफेर कर अवैध कमीशन, बिना हिसाब की शराब बिक्री और लाइसेंस प्रक्रिया के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए की अवैध कमाई की।

घोटाले का ‘ब्लूप्रिंट’: इन 4 तरीकों से लूटा गया सरकारी खजाना

ED की जांच में सिंडिकेट द्वारा अवैध धन अर्जित करने के चार प्रमुख तरीके (Modus Operandi) सामने आए हैं:

  1. कमीशन खोरी (Part-A): शराब आपूर्तिकर्ताओं से आधिकारिक बिक्री पर मोटा कमीशन वसूला गया। इसके लिए राज्य द्वारा भुगतान की जाने वाली ‘लैंडिंग कीमत’ को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया, जिसका सीधा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ा।

  2. कच्ची पर्ची/बिना हिसाब की शराब (Part-B): सरकारी दुकानों से समानांतर सिस्टम चलाया गया। डुप्लीकेट होलोग्राम और नकद में खरीदी गई बोतलों से ‘बिना हिसाब’ देसी शराब बेची गई। इससे सरकार को एक्साइज ड्यूटी और टैक्स का भारी नुकसान हुआ।

  3. कार्टेल कमीशन: डिस्टिलर्स से उनका मार्केट शेयर बचाने और लाइसेंस रिन्यू करने के बदले सालाना रिश्वत वसूली गई। इस कार्टेल ने प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी।

  4. FL-10A लाइसेंस का खेल: विदेशी शराब निर्माताओं से कमीशन खाने के लिए एक नई लाइसेंस श्रेणी (FL-10A) बनाई गई। इसमें मुनाफे का करीब 60% हिस्सा सीधे सिंडिकेट की जेब में गया।

अब तक 81 आरोपीयो पर कसा शिकंजा

ताजा शिकायत में ED ने 59 नए आरोपियों को शामिल किया है, जिससे कुल आरोपियों की संख्या अब 81 हो गई है। जांच में प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं की गहरी सांठगांठ उजागर हुई है।

  • राजनीतिक चेहरा: तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा और तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र चैतन्य बघेल पर नीतिगत सहमति देने और अवैध लाभ उठाने के गंभीर आरोप हैं।

  • किंगपिन और सिंडिकेट: इस पूरे सिंडिकेट का नेतृत्व अनवर ढेबर और उनके सहयोगी अरविंद सिंह कर रहे थे।

  • ब्यूरोक्रेसी का रोल: रिटायर्ड आईएएस और तत्कालीन संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा, तत्कालीन आबकारी आयुक्त आईएएस निरंजन दास और सीएमओ में तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया की भूमिका अहम रही। सौम्या चौरसिया पर अवैध नकदी प्रबंधन और चहेते अधिकारियों की नियुक्ति का आरोप है।

  • कार्यान्वयन की जिम्मेदारी: CSMCL के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण पति त्रिपाठी (ITS) को अवैध वसूली बढ़ाने और पार्ट-बी ऑपरेशन के समन्वय का जिम्मा सौंपा गया था।

फील्ड अफसर और निजी कंपनियां भी रडार पर

ED ने जनार्दन कौरव और इकबाल अहमद खान सहित करीब 30 फील्ड-लेवल आबकारी अधिकारियों पर भी आरोप लगाए हैं, जिन्होंने ‘प्रति केस तय कमीशन’ लेकर अवैध शराब बिकवाई।

निजी कंपनियों में M/s छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, M/s भाटिया वाइन मर्चेंट्स और M/s वेलकम डिस्टिलरीज ने अवैध पार्ट-बी निर्माण और कमीशन भुगतान में हिस्सा लिया। नकदी कलेक्शन का काम सिद्धार्थ सिंघानिया और डुप्लीकेट होलोग्राम सप्लाई का काम विधु गुप्ता देख रहे थे।

गिरफ्तारी और कुर्की: होटल वेनिंगटन कोर्ट भी जब्त

PMLA 2002 की धारा 19 के तहत ED ने अब तक 9 प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, सौम्या चौरसिया और निरंजन दास शामिल हैं। (नोट: रिपोर्ट के अनुसार ये PMLA के तहत नामजद प्रमुख आरोपी हैं)।

कार्रवाई के दौरान अब तक 382.32 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसमें कुल 1,041 संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें रायपुर का हotel वेनिंगटन कोर्ट और ढेबर व बघेल परिवार से जुड़ी सैकड़ों संपत्तियां हैं।

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