धमतरी/बिरेतरा।
बच्चों के भविष्य को संवारने और बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम लाने के लिए धमतरी जिले के ग्राम पंचायत बिरेतरा ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश और इंटरनेट मीडिया पर हो रही है। ग्रामीणों, पालकों और स्कूल प्रबंधन ने मिलकर फैसला लिया है कि गांव में शाम 6 बजे के बाद कोई भी स्कूली छात्र घर से बाहर नहीं निकलेगा। इतना ही नहीं, मोबाइल के अनावश्यक उपयोग और सार्वजनिक स्थानों पर नशापान करने पर भी भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
शाम 6 के बाद ‘नो एंट्री’, निगरानी समिति रखेगी नजर
ग्राम पंचायत बिरेतरा में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। फैसले के मुताबिक, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी शाम 6 बजे के बाद गांव के चौक-चौराहों, गली-मोहल्लों, दुकानों या पान ठेलों पर दिखाई नहीं देंगे। छात्रों को मोबाइल और टीवी से दूर रहकर केवल पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना होगा। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ‘वार्ड निगरानी समिति’ का गठन किया गया है, जो सुबह-शाम बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखेगी।
नियम तोड़ने पर 5 हजार, नशा करने पर 50 हजार तक जुर्माना
नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए अर्थदंड भी तय किया गया है। यदि कोई छात्र या पालक इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उन पर 5 हजार रुपये का दंडात्मक जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, नशा मुक्त गांव बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। सार्वजनिक स्थानों पर नशापान करते पाए जाने पर 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। गांव के कोटवार द्वारा मुनादी कराकर सभी को इन नियमों की सूचना दे दी गई है।
पड़ोसी गांवों ने भी की सराहना
इस मुहिम में बिरेतरा के अलावा पड़ोसी गांव रावनगुड़ा, लिमतरा और धौराभाठा के ग्रामीण भी शामिल हुए। उन्होंने इस निर्णय की सराहना की है और कहा है कि यदि बिरेतरा का रिजल्ट बेहतर आता है, तो वे भी अपने गांवों में इन नियमों को लागू करेंगे।
लक्ष्य: 12वीं में 100% रिजल्ट
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिरेतरा के प्राचार्य गेवाराम साहू ने बताया कि पिछले वर्ष 10वीं का परिणाम 68% और 12वीं का 76% था। इस वर्ष कड़े नियमों के जरिए 10वीं में 80% और 12वीं में 100% परिणाम लाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में स्कूल में 9वीं से 12वीं तक कुल 241 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
छात्र बोले- भविष्य के लिए जरूरी है सख्ती
इस फैसले का छात्रों ने भी स्वागत किया है। कक्षा 12वीं की छात्रा भावना यादव ने कहा कि अब वे घर पर ही पढ़ाई कर रही हैं और उनका लक्ष्य 90% अंक लाना है। छात्रा हीना सिन्हा ने बताया कि शाम को अब गलियों में छात्र नहीं दिखते, जिससे पढ़ाई का माहौल बना है। वहीं, छात्र रविशंकर साहू और सत्यम कुमार ने माना कि इससे नशाखोरी और आवारागर्दी पर लगाम लगी है, जो उनके अच्छे भविष्य के लिए जरूरी था।
पालकों पर भी नियम लागू
ग्राम पंचायत बिरेतरा निवासी व पूर्व विधायक रंजना साहू के पति डिपेन्द्र साहू ने बताया कि यह पहल गांव को नशामुक्त करने और बच्चों को मोबाइल की लत से बचाने के लिए की गई है। यह नियम केवल बच्चों पर ही नहीं, बल्कि पालकों पर भी समान रूप से लागू होगा।






