क्या यही था अटल जी का स्वप्न?
रायपुर/धरसीवा (दुर्गा प्रसाद बंजारे)।
धरसीवा विकासखंड के सांकरा गांव स्थित अटल चौक की दुर्दशा देखकर हर किसी के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जन-जन के हृदय में बसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने ऐसे ही चौक का सपना देखा था? सांकरा पठारीडीह मार्ग पर बने इस चौक के आसपास घनी आबादी है, जहां ग्रामीणों का आना-जाना, बच्चों का खेलना और सांस्कृतिक गतिविधियां होती हैं। लेकिन, अटल स्तंभ के सामने पसरी कीचड़ और गंदगी देखकर ऐसा लगता है मानो जिम्मेदार लोगों को अटल जी के नाम पर बने इस चौक और उनके सपनों की कोई परवाह ही नहीं है।
मुख्य मार्ग किनारे की नालियों की सफाई वर्षों से नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल और तत्कालीन जनपद सीईओ अशोक चतुर्वेदी के प्रयासों से सांकरा पठारीडीह पीएम सड़क का निर्माण हुआ था। उस दौरान ग्रामीणों की मांग पर सड़क के दोनों ओर गांव की सीमा में नालियां भी बनाई गईं थीं। विडंबना यह है कि निर्माण के बाद से इन नालियों की कभी सफाई नहीं हुई। चौक से लेकर ग्राम पंचायत तक पीएम सड़क किनारे की नालियां मिट्टी से पूरी तरह पट चुकी हैं। इस दौरान कई सरपंच बदले, लेकिन पंचायत का यही तर्क रहा कि इन नालियों की सफाई ग्राम पंचायत नहीं, बल्कि पीएम सड़क विभाग कराएगा। जबकि पूर्व में कई बार तत्कालीन विधायक व जनपद सीईओ ने भी पंचायत को इन नालियों की सफाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन पंचायत ने आज तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसका नतीजा यह है कि हल्की बारिश में भी नालियों में जमा गंदगी स्थानीय निवासियों के घरों के किचन तक में घुस जाती है।
अपने खर्च से नाली साफ कराने को मजबूर रहवासी
अटल चौक के पास रहने वाले लोग खुद के पैसे खर्च करके नाली साफ करवा रहे हैं, लेकिन आगे नाली चोक होने के कारण पानी अटल चौक में भर जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
तालाब की मुरूम ने बढ़ाई मुसीबत
कुछ दिनों पहले सांकरा के मांगी तालाब से निकाली गई मुरूम में से कुछ मुरूम अटल चौक में डंप कर दी गई थी। बाद में मुरूम तो उठा ली गई, लेकिन सतह पर कुछ मुरूम अब भी मौजूद है। इसे न तो ठीक से फैलाया गया और न ही पूरी तरह से हटाया गया। यही मुरूम बारिश में कीचड़ में तब्दील होकर अटल चौक की दुर्दशा का मुख्य कारण बन गई है।
यह स्थिति न केवल स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर बने चौक की गरिमा को भी ठेस पहुंचा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि अटल चौक को उसकी वास्तविक पहचान मिल सके।









