न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने कहा- मौलिक अधिकारों का हुआ हनन, पिता और दोषी कर्मचारी से होगी वसूली
इलाहाबाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग बेटियों को कथित तौर पर जबरन अवैध हिरासत में रखने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने दोनों पीड़ित बहनों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें कुल 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि दोनों बहनों के मौलिक अधिकारों का गैरकानूनी तरीके से हनन हुआ है, जिसके आधार पर यह हर्जाना तय किया गया है।
यह मामला दोनों सगी बहनों की ओर से दाखिल की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, दोनों बहनों ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म अपनाया था, जिसके बाद उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध हिरासत में रखे जाने का आरोप लगाया गया था। इस मामले को अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का गंभीर प्रकरण माना है।
मुआवजे की वसूली और समय सीमा का निर्धारण
अदालत के आदेशानुसार, मुआवजे की यह राशि फैसले की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर चुकानी होगी। उत्तर प्रदेश सरकार और दोनों लड़कियों के पिता को इस मुआवजे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि लड़कियों के पिता से और शेष 50 प्रतिशत राशि उस दोषी सरकारी कर्मचारी से वसूलने का अधिकार होगा, जिसकी लापरवाही या कार्रवाई के कारण स्वतंत्रता का असंवैधानिक हनन हुआ।
न्यायमूर्ति संदीप जैन के इस फैसले को पीड़ित बहनों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस न्यायिक आदेश पर अब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है।









