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ओम हॉस्पिटल के कैशियर ने किया 11.41 लाख का घोटाला

Om Hospital Raipur Fraud

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रायपुर।

राजधानी के डीडी नगर थाना क्षेत्र स्थित ओम हॉस्पिटल में प्रबंधन के भरोसे का कत्ल करते हुए लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। अस्पताल के ही कैशियर ने शातिर तरीके से 11 लाख 41 हजार रुपये की अमानत में खयानत की है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा की गई आंतरिक जांच में पोल खुलने के बाद डीडी नगर पुलिस ने आरोपी कैशियर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

ओम हॉस्पिटल के पार्टनर विनोद कुमार अग्रवाल द्वारा पुलिस को दी गई लिखित शिकायत के मुताबिक, आरोपी ओम प्रकाश गिर पिछले करीब ढाई वर्षों से अस्पताल में कैशियर के पद पर कार्यरत था। उसका मुख्य काम मरीजों की बिलिंग करना और उनसे नगद या ऑनलाइन भुगतान प्राप्त करना था। अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि ओम प्रकाश गिर ने सुनियोजित तरीके से मरीजों से प्राप्त ऑनलाइन भुगतान को अस्पताल के खाते में जमा करने के बजाय निजी उपयोग में लिया।


रसीदों के मिलान से खुला राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब करीब चार-पांच दिन पहले अस्पताल प्रबंधन ने रूटीन ऑडिट के तहत मरीजों की बिलिंग और जमा रसीदों का मिलान किया। इसमें कई रसीदें गायब मिलीं। जब इस बाबत कैशियर ओम प्रकाश गिर से सवाल किया गया, तो उसने रसीद काटना भूल जाने का बहाना बनाया और गोलमोल जवाब देने लगा।


असिस्टेंट के खाते को बनाया जरिया

संदेह गहराने पर प्रबंधन ने कैशियर के असिस्टेंट के रूप में कार्यरत काव्या वर्मा से पूछताछ की। काव्या ने बताया कि बिलिंग की कुछ रकम उसके निजी खाते में आई थी, जिसकी जानकारी उसने ओम प्रकाश को दी थी। जब काव्या के बैंक स्टेटमेंट की जांच की गई, तो प्रबंधन के होश उड़ गए। स्टेटमेंट में 11 लाख 41 हजार रुपये का ऐसा ट्रांजेक्शन मिला, जो अस्पताल के खाते में पहुंचा ही नहीं था।

काव्या वर्मा ने स्पष्ट किया कि 09 अप्रैल 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच ओम प्रकाश गिर के कहने पर वह अपने खाते में आई मरीजों की रकम को उसके बताए अनुसार अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करती रही।


खातों में डायवर्ट किया पैसा

जांच में सामने आया कि गबन की गई राशि ओम प्रकाश गिर के एचडीएफसी बैंक खाते, बैंक ऑफ बड़ौदा से लिंक मोबाइल नंबर और उसके अन्य परिचितों के खातों में भेजी गई। काव्या ने प्रबंधन को बताया कि उसके पास अस्पताल का कोई पैसा शेष नहीं है, सारा पैसा आरोपी के निर्देश पर ट्रांसफर किया गया है।


पुलिस कर रही जांच

ओम प्रकाश गिर द्वारा मरीजों की रसीद काटे बिना राशि को निजी और परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर उपयोग करने को ‘अमानत में खयानत’ मानते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। डीडी नगर पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि अन्य लोगों की संलिप्तता पाई गई, तो उन पर भी कार्रवाई होगी।

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