✍️ विशेष संवाददाता
जशपुर | जशपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शतरंज को केवल एक खेल नहीं, बल्कि परंपरा और संस्कृति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि शतरंज हमें जीवन जीने की कला सिखाती है और यह सिखाती है कि कैसे हर चुनौती का सामना धैर्य के साथ किया जाए। साव के अनुसार, शतरंज के मोहरे और खाने हमें जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों के लिए तैयार करते हैं।
धैर्य और एकाग्रता का पाठ पढ़ाती है बिसात
अरुण साव ने खेल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में कोई भी कदम आगे बढ़ाने से पहले सोचना और सही निर्णय लेना बेहद जरूरी है, जो हमें शतरंज से सीखने को मिलता है। उन्होंने आगे कहा कि कठिन समय में धैर्य न खोना और एकाग्रता बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है। शतरंज के 64 खानों और 32 मोहरो में जीवन की गहरी सीख छिपी हुई है, जो खिलाड़ी को सोच-समझकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
शुभारंभ अवसर पर उपस्थित रहे कई दिग्गज
इस भव्य कार्यक्रम में कई प्रमुख व्यक्तित्वों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में वनवासी कल्याण आश्रम के योगेश बापट, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह और नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत मौजूद थे। इनके साथ ही जशपुर जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगा राम भगत, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह और मुख्य नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय भी शामिल हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी और कोच भी उपस्थित रहे।








