मुख्यमंत्री के सुपोषण अभियान को महासमुंद में मिली बड़ी कामयाबी
OM Darpan
Jul 29, 2026 09:11 pm
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29 Jul 2026
महासमुंद। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को लेकर किए जा रहे सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखने लगे हैं। इसी कड़ी में महासमुंद जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए नई उम्मीद और जीवनदान का केंद्र बनकर उभरा है। कलेक्टर श्री विनय लंगेह के मार्गदर्शन में संचालित इस केंद्र के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 357 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार कर उन्हें स्वस्थ जीवन की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वित प्रयासों की प्रेरक मिसाल मानी जा रही है।
माताओं को 2250 रुपए की मदद और बच्चों को मिलता है पौष्टिक आहार
जिला अस्पताल में संचालित 15 बिस्तरों वाले एनआरसी में 1 माह से 5 वर्ष तक के गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क उपचार, विशेष चिकित्सकीय निगरानी और संतुलित पोषण मुहैया कराया जाता है। उपचार के दौरान बच्चों को एफ-75, एफ-100 थेराप्यूटिक फूड, फार्मूला मिल्क के साथ दलिया, खिचड़ी, हलवा, इडली जैसे सुपाच्य और पौष्टिक आहार दिए जाते हैं, जिससे उनका वजन और स्वास्थ्य तेजी से सुधरता है। केंद्र की एक विशेषता यह भी है कि यहां बच्चों के साथ रहने वाली माताओं की देखभाल का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। उन्हें प्रतिदिन दो समय पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है तथा उपचार अवधि पूर्ण होने पर 2,250 रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। माताओं को स्थानीय सामग्री से पौष्टिक भोजन तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है।सुपरवाइजर शीला प्रधान ने कहा- 13 सीटों पर बच्चों का चल रहा इलाज
एनआरसी में भर्ती की प्रक्रिया को भी बेहद सरल बनाया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन की अनुशंसा पर अथवा पालकों की पहल पर बच्चों को सीधे भर्ती किया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर श्रीमती शीला प्रधान ने बताया कि वर्तमान में केंद्र की 15 सीटों में से 13 बच्चों का उपचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में विश्वकर्मा नगर की तीन वर्षीय गंभीर रूप से कम वजन वाली बालिका को केंद्र में भर्ती किया गया है। उसकी माता को पूरा विश्वास है कि 14 दिनों की विशेष पोषण देखभाल और उपचार के बाद उनकी बेटी स्वस्थ होकर घर लौटेगी। महासमुंद का यह केंद्र कुपोषण के खिलाफ सामुदायिक जागरूकता और मातृ सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल बनकर सामने आया है।जरूरी खबरें
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