सुकमा में बिहान की दीदियों ने बाड़ी से संवारी तकदीर, आत्मनिर्भरता की पेश की मिसाल
OM Darpan
Jul 18, 2026 08:49 pm
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18 Jul 2026
सुकमा।
सुकमा जिले के ग्रामीण अंचलों में आत्मनिर्भरता की एक नई लहर दिखाई दे रही है। यहां राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी क्रियान्वयन और जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में ग्रामीण महिलाएं अपने घरों की बाड़ी (किचन गार्डन) में सब्जियां उगाकर आर्थिक मजबूती की मिसाल पेश कर रही हैं। महिलाएं न केवल अपने परिवार की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि बाजार से सब्जी खरीदने पर होने वाले खर्च को भी काफी हद तक कम कर दिया है।
दंतेश्वरी समूह की गंगी, कोसी और पूजा ने बदली तस्वीर
विकासखंड सुकमा के ग्राम डोडपाल में दंतेश्वरी स्व-सहायता समूह से जुड़ी गंगी, कोसी और पूजा अब किचन गार्डन की विशेषज्ञ बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने बताया कि बिहान से जुड़ने से पहले उन्हें घर में सब्जी उगाने की सही तकनीकी जानकारी नहीं थी। प्रशिक्षण और प्रशासन के प्रोत्साहन के बाद उन्होंने अपने घर की खाली जगह का उपयोग शुरू किया। आज उनकी बाड़ी में लौकी, करेला, बरबट्टी, तोरई, बैंगन, मिर्च और कट्टा भाजी जैसी मौसमी सब्जियां लहलहा रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने मक्का की खेती कर अतिरिक्त आय की राह भी बनाई है।जैविक खेती से स्वस्थ हुआ परिवार, घटी रसायनों पर निर्भरता
बिहान की दीदियों ने खेती के परंपरागत और जैविक तरीकों को प्राथमिकता दी है। गंगी, कोसी और पूजा के अनुसार, वे रासायनिक खाद के स्थान पर रसोई के कचरे से बनी कंपोस्ट और गोबर खाद का उपयोग कर रही हैं। इससे परिवार को सालभर शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक सब्जियां मिल रही हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य अब इस सफल मॉडल को जिले के हर ग्रामीण परिवार तक पहुंचाना है, ताकि पोषण सुरक्षा के साथ-साथ महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा हों। घर की बाड़ी अब इन परिवारों के लिए सेहत और बचत की नई कहानी लिख रही है।जरूरी खबरें
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