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गांव के स्कूल से मुख्यमंत्री पद तक की स्मृतियों को किया साझा
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तकनीक के दौर में शिक्षकों की भूमिका को बताया सबसे अहम
✍️ विशेष संवाददाता
रायपुर | शिक्षक दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के शिक्षकों के नाम एक आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया है। इस पत्र में मुख्यमंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए बचपन के संघर्षों और शिक्षा प्राप्त करने की कठिनाइयों का जिक्र किया है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि वे हर बच्चे की छिपी प्रतिभा को पहचानें और उन बच्चों का विशेष ध्यान रखें जो अभाव या संकोच की वजह से पीछे रह जाते हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पत्र में लिखा है कि आज जब वे मुख्यमंत्री के रूप में बच्चों के भविष्य से जुड़े निर्णय लेते हैं, तो उन्हें अपने बचपन के दिन और अधिक याद आते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में पद और कद चाहे जितना बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता है।
बगिया के साधारण स्कूल से शुरू हुआ था शिक्षा का सफर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने पत्र में बताया कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा गांव के ही स्कूल से शुरू हुई थी, लेकिन जीवन ने बहुत कम उम्र में उनकी कड़ी परीक्षा ली। जब वे चौथी कक्षा में थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद छोटी उम्र में ही परिवार, खेती और भाइयों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।
गांव में पांचवीं तक पढ़ाई के बाद वे आगे की शिक्षा के लिए कुनकुरी के लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गए, जहां वे एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़े। हालांकि, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके और उन्हें खेती के साथ भाइयों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। उन्होंने याद किया कि उस दौर में शिक्षा तक पहुंचना आज जैसा आसान नहीं था, स्कूल दूर थे और संसाधनों का काफी अभाव था।
स्लेट-तख्ती के दौर से स्मार्ट क्लास तक का बड़ा बदलाव
शिक्षा व्यवस्था में आए बदलावों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्लेट, तख्ती और चॉक से शुरू हुई पढ़ाई अब स्मार्ट क्लास तक पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ के बच्चे अब डिजिटल माध्यमों और आधुनिक तकनीक से जुड़ रहे हैं। उन्होंने खुशी जताई कि जिन दूरस्थ अंचलों में कभी स्कूल पहुंचना चुनौती था, वहां आज आधुनिक शैक्षणिक संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक चाहे जितनी भी जानकारी दे दे, लेकिन बच्चे के भीतर आत्मविश्वास और संस्कार केवल एक शिक्षक ही जगा सकता है।
पिछड़ रहे बच्चों का हाथ थामने का विशेष आग्रह
विष्णु देव साय ने गुरुजनों से आग्रह किया कि वे कक्षा में बैठे हर बच्चे की संभावनाओं को पहचानें। उन्होंने विशेष तौर पर उन बच्चों का हाथ थामने को कहा जो गरीबी या झिझक के कारण पीछे छूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत राज्य सरकार शिक्षा को सहज और आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। इसमें मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसरों को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बस्तर का उदाहरण देते हुए कहा कि उन क्षेत्रों में भी स्कूलों की घंटियां फिर से गूंजने लगी हैं, जो वर्षों से बंद थे। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे हर स्कूल को सपनों का द्वार और हर कक्षा को संभावनाओं का संसार बनाएं। अंत में मुख्यमंत्री ने सभी गुरुजनों के स्वस्थ और सुखद जीवन की कामना करते हुए शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं।









