बेमेतरा।
बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत जिला पंचायत सभागार में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला में जिला कार्यक्रम अधिकारी चंद्रबेस सिंह सिसोदिया, जिला बाल संरक्षण अधिकारी व्योम श्रीवास्तव और परियोजना समन्वयक राजेंद्र चंद्रवंशी ने प्रमुख रूप से प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी, परियोजना अधिकारी, परिवेक्षक, मिशन वात्सल्य के कर्मचारी, डीपीएम बिहान और डीपीएम स्वस्थ ने भाग लिया।
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प्रशिक्षण का उद्देश्य
कार्यशाला का उद्देश्य बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 के प्रावधानों के तहत बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को प्रभावी बनाना था। चर्चा में बाल विवाह के कुप्रभावों पर जोर दिया गया, जिनमें शिक्षा में बाधा, मानसिक व शारीरिक विकास में रुकावट, समयपूर्व गर्भावस्था, शिशु और मातृ मृत्यु दर में वृद्धि और कुपोषण जैसे गंभीर मुद्दे शामिल रहे। अंत में सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह रोकथाम की शपथ दिलाई गई।
अभियान में सहभागिता
इस अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए विकासखंड, सेक्टर और ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार की योजना बनाई गई है। अधिकारियों ने बताया कि धर्म पुरोहित, टेंट हाउस संचालक, डीजे-बैंडबाजा संचालक, रसोइया, नाई, फोटोग्राफर और शादी कार्ड छापने वालों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि समाज में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
अगले चरण की कार्य योजना
कार्यशाला के अगले चरण में जिले के सभी 46 सेक्टरों में सेक्टर स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें ग्राम पंचायत स्तर के सरपंच, पंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, स्व-सहायता समूह के सदस्य, जनप्रतिनिधि व महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भाग लेंगे।
जिला प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने समाज के सभी वर्गों से बाल विवाह रोकने और एक शिक्षित व स्वस्थ समाज के निर्माण में सहयोग की अपील की है। यह अभियान समाज में जागरूकता लाने और बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।










