नई दिल्ली (ओमदर्पण न्यूज़)।
भारत में ‘मैरिटल रेप’ (पत्नी की सहमति के बिना शारीरिक संबंध बनाना) एक ऐसा गंभीर मुद्दा है, जिसे अपराध घोषित करने से देश का कानून अब तक हिचकता रहा है। समाज में इस विषय पर अक्सर चुप्पी साध ली जाती है, लेकिन जियो हॉटस्टार (JioHotstar) पर हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘चिरैया’ ने इस ज्वलंत मुद्दे की ओर एक बार फिर पूरे देश का ध्यान खींचा है। रिलीज होने के कुछ ही समय में लाखों दर्शकों द्वारा देखी जा चुकी यह सीरीज इस प्लेटफॉर्म की सबसे लोकप्रिय हिंदी सीरीज बन गई है।
मीडिया आलोचकों द्वारा इस सीरीज की जमकर तारीफ की जा रही है क्योंकि यह एक ऐसे विषय को सामने लाती है जिसे आमतौर पर चारदीवारी के भीतर छिपाकर रखा जाता है। सोशल मीडिया पर अब सहमति और महिला विरोधी सोच (मिसोजिनी) पर एक नई बहस छिड़ गई है।
दो अलग सोच वाली महिलाओं की है कहानी
सीरीज की स्क्रिप्ट राइटर दिवी निधि शर्मा के अनुसार, कहानी मुख्य रूप से दो महिलाओं—कमलेश और पूजा के इर्द-गिर्द घूमती है। दिव्या दत्ता ने कमलेश का किरदार निभाया है, जो एक मिडिल क्लास हाउसवाइफ है और मानती है कि महिलाओं की दुनिया घर-रसोई तक सीमित होनी चाहिए। वहीं, पूजा (प्रसन्ना बिष्ट) एक पढ़ी-लिखी और बराबरी में विश्वास रखने वाली आधुनिक महिला है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब पूजा की शादी कमलेश के देवर अरुण से होती है, जिसे कमलेश ने बेटे की तरह पाला है। अरुण दुनिया की नजर में एक आदर्श पति है, लेकिन शादी की पहली ही रात वह पूजा के साथ बलात्कार करता है। जब पूजा इसका विरोध करती है, तो अरुण का जवाब होता है, “मैंने वही लिया जो मेरा हक़ है।” वह बेखौफ होकर यह भी कहता है कि भारत में मैरिटल रेप अपराध नहीं है, इसलिए उसका कुछ नहीं बिगड़ सकता।
“बोलने से सिर्फ बदनामी होगी”
सीरीज समाज के उस कड़वे सच को दिखाती है जहां जख्मी पूजा जब अपने साथ हुए इस अमानवीय व्यवहार के बारे में परिवार को बताती है, तो उसे न्याय के बजाय ‘समझौता’ करने की सलाह मिलती है। कमलेश शुरुआत में यह मानती है कि शादी में सेक्स के लिए सहमति अपने आप मिल जाती है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने पर उसका नजरिया बदलता है और वह पितृसत्तात्मक सोच से बाहर निकलकर पूजा का साथ देती है।
कानूनी स्थिति और आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में शादीशुदा महिलाओं में से लगभग 6.1 फीसदी को कभी न कभी यौन हिंसा झेलनी पड़ी है। दशकों के आंदोलनों के बावजूद, भारत आज भी उन चुनिंदा देशों (जैसे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और सऊदी अरब) की सूची में है, जहां मैरिटल रेप को अपराध नहीं माना जाता। भारतीय कानून (जो औपनिवेशिक दौर का है) के तहत अगर पत्नी नाबालिग नहीं है, तो पति द्वारा जबरन बनाए गए संबंध अपराध की श्रेणी में नहीं आते।
क्या कहते हैं सीरीज के निर्माता और निर्देशक?
यह सीरीज मूल रूप से बांग्ला शो ‘संपूर्णा’ पर आधारित है, जिसे उत्तर भारत के पितृसत्तात्मक माहौल के अनुरूप ढाला गया है। निर्देशक शशांत शाह का कहना है कि कमलेश का किरदार ऐसा बुना गया है जिससे भारत की कई महिलाएं खुद को जोड़ सकें। उनका उद्देश्य सरकार या कानून पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि समाज को सोचने पर मजबूर करना है। उन्होंने कहा, “हमने पुरुष किरदारों को किसी खलनायक की तरह नहीं दिखाया है। वे आम लोग हैं। पितृसत्ता इतनी गहरी है कि लोग खुद नहीं समझ पाते कि वे गलत कर रहे हैं।”
दिव्या दत्ता का कहना है कि सीरीज को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। हालांकि कुछ लोग इसे ‘पुरुष विरोधी’ भी बता रहे हैं, लेकिन लेखिका दिवी निधि शर्मा का स्पष्ट कहना है कि उनका मकसद सिर्फ बातचीत शुरू करना था। बदलाव की शुरुआत घर से ही करनी होगी, और यही ‘चिरैया’ का मुख्य संदेश है।






