महासमुंद (सत्यानंद सोई)।
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र में स्थित गढ़ फुलझर को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इस प्रयास को बल उस समय मिला जब कोलता समाज के 20वें रामचंडी दिवस के अवसर पर एक भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के लोग शामिल हुए और ओडिशा व छत्तीसगढ़ की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को रेखांकित किया गया।
मुख्यमंत्री को इस अवसर पर हुलहुली बजाकर पारंपरिक स्वागत किया गया। उन्होंने कोलता समाज को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह समाज भारतीय संस्कृति और परंपरा का ध्वजवाहक है। खेती-किसानी पर आधारित इस समाज का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ और ओडिशा की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंध प्राचीन हैं। दोनों प्रदेशों के लोगों का रोटी-बेटी का संबंध है, और उनके अचार-विचार में समानता है।”
गढ़ फुलझर का ऐतिहासिक महत्व उस समय से जुड़ा है जब प्रभु राम ने रावण पर विजय पाने के लिए देवी चंडी की आराधना की थी। मान्यता है कि राम ने कठोर साधना कर देवी चंडी को प्रसन्न किया और उनसे युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी उपासना के कारण देवी का नाम रनेश्वर रामचंडी पड़ा, जो कोलता समाज की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं।
फुलझर के गढ़ में रनेश्वर रामचंडी की प्रतिष्ठा का यह स्थान प्राकृतिक और धार्मिक महत्व का केंद्र है। यहाँ स्थित राजा तालाब और रानी तालाब इस क्षेत्र के ऐतिहासिक धरोहरों का प्रतीक हैं। यहाँ के आदिवासी भैना राजा ने गुरु नानक देव जी को चार एकड़ भूमि भेंट कर नानक सागर नामक गाँव की स्थापना की थी। वर्ष 2004 में रनेश्वर रामचंडी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, जिसके बाद से हर साल रामचंडी दिवस का आयोजन धूमधाम से किया जाता है।
इस वर्ष रामचंडी दिवस के आयोजन का 20वां वर्ष था। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के आठ और ओडिशा के 12 जिलों से लोगों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन में कोलता समाज के अलावा अन्य समाजों के लोग भी उपस्थित थे।
कोलता समाज प्रमुख रूप से कृषि कार्यों में संलग्न है और इस समाज के लोग धार्मिक, सेवाभावी और शिक्षा के प्रति विशेष रुचि रखने वाले होते हैं। समाज का संगठन चार अंचलों में विभाजित है, जिनके अंतर्गत 30 शाखाएं आती हैं। प्रत्येक 100 व्यक्तियों में एक ग्राम प्रतिनिधि होता है। कोलता समाज के लोग परंपरा और संस्कृति से जुड़े रहते हुए प्रगति की दिशा में अग्रसर हैं।
इस प्रकार गढ़ फुलझर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व इस क्षेत्र को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरने की संभावना प्रदान करता है, जहाँ भविष्य में अधिक से अधिक लोग रामचंडी देवी की आराधना और इस धरोहर को निहारने आएंगे।










