14 सितम्बर 2026 |
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तीन हार्डकोर माओवादी आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे

OM Darpan

Mar 11, 2025 08:36 am 331 views
तीन हार्डकोर माओवादी आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे

गरियाबंद।

शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति और आत्मसमर्पित साथियों के खुशहाल जीवन से प्रभावित होकर तीन हार्डकोर माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। गरियाबंद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वालों में एसडीके एरिया कमेटी के डिप्टी कमांडर दिलीप उर्फ संतू (₹8 लाख इनामी), एसडीके एरिया कमेटी एसीएम मंजुला उर्फ लखमी (₹5 लाख इनामी) और बरगढ़ एरिया कमेटी सदस्य सुनीता उर्फ जुनकी (₹5 लाख इनामी) शामिल हैं।

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जंगल से मुख्यधारा तक: तीन माओवादियों की कहानी

1. दिलीप उर्फ संतू (₹8 लाख इनामी) - डिप्टी कमांडर, एसडीके एरिया कमेटी

दिलीप उर्फ संतू, निवासी ग्राम केसेकोडी, थाना कोयलीबेडा, जिला कांकेर, वर्ष 2012 में शंकर (DVCM) के माध्यम से माओवादी संगठन में भर्ती हुआ। उसने रावघाट, ताराझर, गरियाबंद-धमतरी सीमा और एसडीके एरिया कमेटी में विभिन्न पदों पर कार्य किया। वर्ष 2020 में उसे डिप्टी कमांडर की जिम्मेदारी मिली। सीतानदी, आमामेरा और गोबरा क्षेत्र में माओवादी घटनाओं में सक्रिय रूप से शामिल रहा, जिनमें सिकासेर जंगल में मुठभेड़ और भालूडिग्गी पहाड़ी पर हुई मुठभेड़ शामिल हैं, जहां 16 माओवादी मारे गए थे

2. मंजुला उर्फ लखमी (₹5 लाख इनामी) - एसडीके एरिया कमेटी एसीएम

मंजुला उर्फ लखमी, निवासी ग्राम गोंदीगुडेम, थाना गोलापल्ली, जिला सुकमा, वर्ष 2016 में किस्टाराम एरिया कमेटी के एसीएम सोमा के माध्यम से संगठन में शामिल हुई। बाद में इसे अबूझमाड़ और फिर धमतरी के सीतानदी क्षेत्र में भेजा गया। वर्ष 2019 में इसे एसडीके एरिया कमेटी में सदस्य बनाया गया, जहां 2025 तक सक्रिय रही। सिकासेर जंगल और भालूडिग्गी पहाड़ी की मुठभेड़ों में शामिल रही, जहां कई माओवादी मारे गए थे।

3. सुनीता उर्फ जुनकी (₹5 लाख इनामी) - बरगढ़ एरिया कमेटी सदस्य

सुनीता उर्फ जुनकी, निवासी ग्राम पोटेन, थाना जांगला, जिला बीजापुर, वर्ष 2010 में भैरमगढ़ एरिया कमेटी के एसीएम रैमोती द्वारा संगठन में भर्ती की गई। वर्ष 2011 में इसे बरगढ़ एरिया कमेटी में भेजा गया, जहां यह 2024 तक सक्रिय रही। जनवरी 2025 में गरियाबंद के भालूडिग्गी पहाड़ी में पुलिस मुठभेड़ में शामिल थी, जिसमें एसजेडसीएम विकास को गोली लगी, जबकि यह भागने में सफल रही

माओवादी संगठन की सच्चाई और समर्पण का निर्णय

तीनों माओवादियों ने माओवादी संगठन की खोखली विचारधारा और निर्दोष ग्रामीणों पर हो रहे अत्याचारों के बारे में खुलासा किया। उन्होंने बताया कि माओवादी संगठन अब निर्दोष लोगों की हत्या, ग्रामीणों का शोषण, विकास कार्यों में बाधा डालना, जबरन भर्ती और अवैध वसूली का अड्डा बन चुका है। बड़े माओवादी कैडर छोटे सदस्यों का शोषण कर रहे हैं और स्थानीय युवाओं को जबरन संगठन में भर्ती कर रहे हैं

शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने पर इनामी राशि, स्वास्थ्य सुविधा, रोजगार और आवास जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। कई पूर्व माओवादी आत्मसमर्पण कर बेहतर जीवन जी रहे हैं, जिनकी सफलता की कहानियां सुनकर इन्होंने भी मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

गरियाबंद पुलिस द्वारा नक्सल प्रभावित गांवों में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान, पोस्टर, पंपलेट और आत्मसमर्पण नीति के प्रचार-प्रसार का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

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