दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के आनंद सरोवर, बघेरा में चल रहे ‘वाह जिंदगी वाह’ कार्यक्रम के चौथे दिन ‘परम सत्ता का ज्ञान’ विषय पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रोफेसर ब्रह्माकुमार ई. वी. गिरीश ने ईश्वर और आध्यात्मिकता को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों पर बेबाकी से अपनी बात रखी।
क्या भगवान कैंसर ठीक कर सकता है?
सभा को संबोधित करते हुए प्रो. गिरीश ने उपस्थित जनसमूह से सीधा सवाल किया— “क्या परमात्मा कैंसर को ठीक कर सकता है?” इस पर लोगों की मिश्रित प्रतिक्रिया (हां और ना) आई। भ्रम को दूर करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान हमारी बीमारी को सीधे तौर पर ठीक नहीं करता। यदि ईश्वर ही सब ठीक कर देता, तो दुनिया में इतने अस्पतालों और डॉक्टरों की आवश्यकता ही नहीं होती।
उन्होंने समझाया, “परमात्मा गुणों एवं शक्तियों का भंडार है। वह आपको शांति, शक्ति, प्रेम और संबल देता है, जिससे आपकी बीमारी ठीक हो सकती है।”
शरीर मोबाइल है तो आत्मा सिम कार्ड
आत्मा और शरीर के संबंध को समझाते हुए वक्ता ने एक रोचक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे मोबाइल बिना सिम कार्ड के बेकार है, वैसे ही यह शरीर भी एक मोबाइल की तरह है और ‘आत्मा’ इसमें सिम कार्ड है। जब तक सिम (आत्मा) है, शरीर रिस्पॉन्ड करता है। आत्मा के निकलते ही शरीर पर अपमान, गाली या गुस्से का कोई असर नहीं होता।
उन्होंने कहा, “हम सभी यह शरीर नहीं, बल्कि इसे चलाने वाली चैतन्य शक्ति ‘आत्मा’ हैं। एक ‘लिटिल स्टार’ जो परमधाम से आई है। जैसे हम पुराने कपड़े त्यागकर नए पहनते हैं, वैसे ही आत्मा भी पुराने शरीर का त्याग कर नया धारण करती है। अंगदान (नेत्र या किडनी) इस बात का प्रमाण है कि शरीर को चलाने वाली एनर्जी (आत्मा) अलग है, जो दूसरे शरीर में भी उन अंगों को क्रियाशील कर देती है।”
जीवन का मैनुअल है आध्यात्मिकता
प्रोफेसर गिरीश ने बताया कि हम हर प्रोडक्ट को उसके मैनुअल के हिसाब से चलाते हैं, लेकिन जीवन का मैनुअल भूल गए हैं। ईश्वर ने हमें जीवन जीने का जो मैनुअल दिया है, वही ‘आध्यात्मिकता’ है। यह मैनुअल दो संबंधों पर टिका है:
स्वयं का स्वयं से संबंध: खुद के आलोचक न बनें, बल्कि मित्र बनें। सेल्फ रिस्पेक्ट और कॉन्फिडेंस रखें।
परमात्मा से संबंध: ईश्वर सुख, शांति और प्रेम का स्रोत है। उससे जुड़कर ही जीवन ‘वाह-वाह’ हो सकता है। हम भौतिक वस्तुओं (गाड़ी, बंगला) में खुशी ढूंढ रहे हैं जो अस्थायी है, जबकि असली खुशी भीतर है।










