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डिजिटल दुनिया में सुरक्षित होंगे बच्चे, आईटी नियमों में हुए बड़े बदलाव
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आईटी नियमों के तहत 3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट
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6,650 कार्यशालाओं के जरिए 11 लाख से अधिक लोगों को किया जागरूक
नई दिल्ली। केंद्र सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल वेल-बीइंग सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय नियामक तरीकों की निरंतर समीक्षा कर रही है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में जानकारी दी कि सरकार हानिकारक कंटेंट, साइबरबुलिंग और डिजिटल लत जैसे जोखिमों को लेकर पूरी तरह सजग है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2021 के माध्यम से एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। इसके तहत मध्यस्थों के लिए यह अनिवार्य है कि वे बच्चों के लिए नुकसानदेह किसी भी जानकारी को होस्ट, डिस्प्ले या शेयर न करें। नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित प्राधिकारियों को रिपोर्ट करना भी अनिवार्य किया गया है।
तीन घंटे में हटेगा आपत्तिजनक कंटेंट
आईटी नियमों में हालिया बदलावों के बाद अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अदालत या सरकार के आदेश के तीन घंटे के भीतर गैर-कानूनी कंटेंट हटाना होगा। इसके साथ ही डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत बच्चों के डेटा प्रोसेसिंग के लिए माता-पिता की सहमति को अनिवार्य बना दिया गया है। यह कानून बच्चों की ट्रैकिंग और व्यवहार की निगरानी पर भी रोक लगाता है।
जागरूकता अभियान से जुड़े लाखों लोग
मंत्रालय ‘सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता’ (आईएसईए) परियोजना के तहत अब तक 6,650 कार्यशालाएं आयोजित कर चुका है। इसमें 11.37 लाख से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया है। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) भी नियमित रूप से सुरक्षा टिप्स और इन्फोग्राफिक्स साझा कर रही है।
भविष्य की चुनौतियों के लिए बड़ी तैयारी
शिक्षा मंत्रालय के ‘प्रज्ञता’ दिशानिर्देश और सीबीएसई की साइबर सुरक्षा हैंडबुक के जरिए स्कूलों में सुरक्षित ऑनलाइन लर्निंग का माहौल बनाया जा रहा है। एनसीईआरटी ने भी अपने पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा को शामिल किया है। सरकार उभरते साइबर मुद्दों पर संबंधित पक्षों के साथ नियमित संवाद कर रही है ताकि भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कानूनी और नीतिगत ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।









