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गुरु नानक देव जी ने अंधकार मिटाकर मानवता को दिखाया ज्ञान का मार्ग: राजा छाबड़ा

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  • 05 नवंबर को श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाएगा गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व

  •  छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज ने तेज़ कीं तैयारियाँ 

 

बेमेतरा।


कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर, जो इस वर्ष बुधवार, 05 नवंबर को पड़ रहा है, सिक्ख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व (अवतार दिवस) देश और दुनिया भर में मनाया जाएगा। गुरु नानक देव के ज्ञान प्रकाश को समर्पित इस दिन को गुरुपर्व या प्रकाश पर्व भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अज्ञानता और अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाया। यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि ‘सतगुर नानक प्रगट्या, मिटी धुंध जग चानण होआ’।

छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज बेमेतरा जिला अध्यक्ष हरदीप सिंघ राजा छाबड़ा ने इस अवसर पर बताया कि गुरु नानक देव जी कलयुग में अवतार हुए और उन्होंने मानवता को सही मार्ग दिखाया।

इक ओंकार: परम शक्ति एक ही है

गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म के मूल दर्शन ‘एक ओंकार’ (इक ओंकार) को प्रतिपादित किया, जिसका अर्थ है ‘परम शक्ति (ईश्वर) एक ही है’। उन्होंने यह उपदेश दिया कि ईश्वर एक है, उसका नाम सत्य है, और वही इस सृष्टि की रचना करने वाला है। उनके उपदेशों को हिन्दुस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, भुटान, तिब्बत, चीन, अफगानिस्तान एवं अन्य कई देशों में रहने वाले अन्य धर्मों के लोग भी बहुत प्यार और सम्मान की नजर से देखते हैं।

गुरु नानक देव जी का जन्म ईस्वी सन् 1469 में अखंडित भारत के राय भोई की तलवंडी (अब पाकिस्तान) में पिता मेहता कालू और माता त्रिप्ता के घर हुआ था। उनका जन्म स्थान आज श्री गुरुद्वारा ननकाणा साहिब, पाकिस्तान में स्थित है। विश्व उन्हें एक दार्शनिक, एक कवि, एक विचारक, एक समाज सुधारक, एक प्रकृति चिंतक और एक कट्टर देशभक्त के रूप में जानता है।

समाज सुधार और सती प्रथा का विरोध

गुरु नानक देव जी ने सामाजिक सुधारों पर विशेष बल दिया। उन्होंने हिन्दुस्तान में चल रही सती प्रथा का जमकर विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप आज भारत सती प्रथा से मुक्त हो पाया है। उन्होंने अपने जीवन में अनेक अमूल्य उपदेश दिए, जिनसे पूरी मानवता को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

सच्चे जीवन के तीन आधार: नाम जपो, किरत करो, वंड छको

गुरु नानक देव जी के तीन प्रमुख उपदेश ‘नाम जपो’, ‘किरत करो’ और ‘वंड छको’ सच्चे और सरब संजीवनी जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं:

1. नाम जपो (Naam Japo): सदा परमात्मा का स्मरण करो और ईश्वर का नाम जपते रहो। मन को शांत करने और आत्मिक शुद्धि के लिए ‘वाहेगुरु’ का सिमरन सबसे बड़ा साधन है।
2. किरत करो (Kirat Karo): ईमानदारी से परिश्रम करो और मेहनत की कमाई से जीवन यापन करो। किसी का हक न मारो और न ही आलस्य से जीवन बिताओ।
3. वंड छको (Vand Chhako): जो कुछ ईश्वर ने दिया है, उसमें से ज़रूरतमंदों के साथ बाँटो। दूसरों की मदद करना ही सच्ची सेवा और इंसानियत है।

गुरु नानक देव जी ने यह भी कहा कि अपनी कमाई का 10 प्रतिशत ज़रूरतमंद गरीब पर खर्च करो, इससे कारोबार और कमाई में बरकत पड़ेगी तथा गुरु की खुशी मिलेगी, क्योंकि ग़रीब का मुख (मुंह) ही गुरुनानक की गोलक है।

लंगर सेवा की महान परंपरा

गुरु नानक देव जी के जन्मदिन को दिवाली के बाद आने वाली कार्तिक पुर्णिमा के दिन सिक्ख और सहजधारी पंजाबी समाज द्वारा बड़े उत्साह धूमधाम से मनाया जाता है। सभी शहरों के गुरुद्वारों से प्रातः 5 बजे प्रभात फेरी निकाली जाती हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भजन कीर्तन व गुरबाणी जाप करते हैं।

गुरु नानक देव जी ने ही लंगर सेवा की प्रथा चलाई थी। एक बार जब उनके पिता मेहता कालू जी ने उन्हें कारोबार करने के लिए 20 रुपए दिए थे, तब गुरु नानक देव जी ने उन 20 रुपए का लंगर लगाकर भूखे महापुरुषों को खाना खिला दिया था। यह परंपरा आज पूरे विश्व के सभी गुरुद्वारों में निःशुल्क लंगर के रूप में चलती है। हम सभी को गुरु नानक देव जी के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाकर मानवता की सेवा करनी चाहिए।

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