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एक लखपति दीदी की प्रेरक कहानी: हेमलता साहू ने निर्माण सामग्री सप्लाई से बदली तकदीर

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दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।

मेहनत और लगन से हर मुश्किल को हराया जा सकता है, इस बात को सच कर दिखाया है दुर्ग जिले के ननकट्टी गांव की हेमलता साहू ने। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के आराध्या स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपने पति के व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि खुद भी एक सफल उद्यमी बनकर उभरी हैं।


 

छोटे व्यवसाय से बड़े सपने की उड़ान

 

हेमलता साहू के पति चेतन लाल साहू पहले गांव में छोटी-मोटी निर्माण सामग्री और फैब्रिकेशन का काम करते थे। पूंजी की कमी उनके व्यवसाय की तरक्की में सबसे बड़ी बाधा थी। इस समस्या को देखते हुए हेमलता ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने समूह के माध्यम से बैंक से ऋण लेने का फैसला किया।

पूंजी जुटाने का सफर:

  • पहला कदम: समूह के जरिए पहली बार ₹60,000 का लोन लिया।
  • दूसरा कदम: बैंक लिंकेज से ₹1,43,000 का दूसरा लोन प्राप्त किया।

इन पैसों से उन्होंने अंबुजा सीमेंट की डीलरशिप ली, जिससे उन्हें ननकट्टी से 15 किलोमीटर के दायरे में सीमेंट सप्लाई का काम मिल गया।


 

व्यवसाय का विस्तार और सफलता का मंत्र

 

सफलता के इस पहले कदम के बाद हेमलता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने फिर से समूह के माध्यम से ₹2 लाख का बैंक लिंकेज लोन लिया और अपने व्यवसाय का विस्तार किया। उन्होंने सीमेंट, सरिया, गिट्टी, रेत और फैब्रिकेशन के लिए कच्ची सामग्री खरीदी। आज उनकी मेहनत और सही फैसलों का नतीजा है कि उनका वार्षिक टर्नओवर ₹50 लाख तक पहुंच गया है।

हेमलता दीदी बताती हैं कि इस व्यवसाय में 10% का मार्जिन मिलता है, जिससे उन्हें सालाना ₹5 लाख की शुद्ध आय होती है। वह जेबरा क्लस्टर के गांवों में पंचायत और जनपद के निर्माण कार्यों, खासकर प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए सामग्री की आपूर्ति करती हैं।


 

परिवार और समाज के लिए प्रेरणा

 

हेमलता साहू आज अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन गई हैं। वह कहती हैं कि समूह से मिले लोन की बदौलत उन्होंने पति के व्यवसाय में बराबर की साझेदारी निभाई है। इस सफलता ने उन्हें न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि उन्हें एक नई पहचान भी दी है।

भविष्य की योजनाएं:

  • बेटी की शिक्षा: बेटी को भारती यूनिवर्सिटी से बीएससी फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई करवा रही हैं।
  • बेटे का करियर: बेटे को पारिवारिक व्यवसाय को और बढ़ाने के लिए एमबीए की शिक्षा दिलाएंगी।

अपनी सफलता से वह चार से पांच लोगों को नियमित रोजगार भी दे रही हैं। हेमलता साहू की यह कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक मिसाल है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

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