



दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।
दिवाली के मौके पर शहरों के बाजारों में रौनक और भीड़ बढ़ी हुई है। खासकर रात के समय बाजारों की चकाचौंध देखने लायक होती है। जिधर देखो उधर खरीद-फरोख्त का माहौल है, जिससे ग्राहकों और दुकानदारों दोनों के चेहरे चमक उठते हैं। इसी भीड़ में एक लड़का, अपने कंधे पर कूड़े का थैला लटकाए, बाजार में घूमता रहता है।
बाजार के अंत में रेडीमेड कपड़ों की एक छोटी सी दुकान है, जिसका मालिक रहमत खान है। वह रोजाना अपनी दुकान के सामने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बच्चों के कपड़े लटकाकर रखता है। रोज़ शाम को उसी दुकान के सामने एक लड़का खड़ा होकर उन कपड़ों को निहारता रहता था। रहमत खान उस लड़के की निहारती आँखों को देखकर समझ गया था कि यह लड़का इन कपड़ों को बेहद पसंद करता है।
लड़का रोज़ रात करीब नौ बजे आता था और कपड़ों को देखकर चला जाता था। रहमत खान ने अनुमान लगा लिया था कि लड़का बेहद गरीब है और शायद अनाथ भी हो सकता है। दिवाली का समय था और रहमत खान ने सोचा कि हो सकता है लड़का कपड़े खरीदना चाहता हो, लेकिन उसकी परिस्थितियां और उसकी गरीबी उसे कपड़े खरीदने की इजाजत नहीं देती। रहमत खान का दिल पसीज गया और उसने लड़के के लिए कुछ करने का सोचा।
एक दिन रात को करीब नौ बजे, जब लड़का रोज़ की तरह दुकान के सामने खड़ा था, रहमत खान ने उसे पास बुलाया और प्यार से पूछा, “क्या बात है बेटा, रोज़ यहाँ क्यों खड़े रहते हो?”
लड़के ने जवाब दिया, “कुछ नहीं अंकल, आपकी दुकान में कपड़े अच्छे लगते हैं, इसलिए देखता हूँ। बस इतना ही।”
रहमत खान ने लड़के का नाम पूछा। उसने बताया, “गोपाल।” फिर उसने बताया कि वह शहर के उस पार झुग्गी में रहता है और उसके माता-पिता नहीं हैं। वे दोनों कोरोना में उसे अकेला छोड़कर चले गए और अब उसकी बूढ़ी दादी ही उसकी देखभाल करती हैं।
रहमत खान ने यह सुनकर लड़के की स्थिति को समझा और उससे कहा, “बहुत देर हो गई है, बेटा। घर जाओ, दादी इंतज़ार कर रही होगी।”
अगले दिन रहमत खान ने एक खूबसूरत शर्ट और नेकर निकाली और काउंटर पर रख दी। उसका इरादा था कि जब गोपाल आएगा, तो वह उसे उपहार में ये कपड़े देगा। रात के नौ बज चुके थे और रहमत खान बड़ी उत्सुकता से गोपाल का इंतजार कर रहे थे। लेकिन जब वह दुकान के पीछे पानी पीने गए, तो लौटने पर उन्होंने देखा कि गोपाल वह शर्ट और नेकर लेकर भाग रहा है।
रहमत खान ने गोपाल को पकड़ लिया और चिल्लाते हुए पूछा, “गोपाल, तुमने ऐसा क्यों किया? मैंने यह शर्ट और नेकर तुम्हें उपहार देने के लिए निकाली थी। तुम्हारी सादगी और मासूमियत मुझे बहुत अच्छी लगी थी, लेकिन आज तुमने मेरा भरोसा तोड़ दिया।”
गोपाल की आँखों में आँसू आ गए और वह रोते हुए रहमत खान के पैर पकड़ने लगा। भीड़ में से किसी ने गोपाल को थप्पड़ मारने की कोशिश की, लेकिन रहमत खान ने उसे रोकते हुए कहा, “कोई भी गोपाल को हाथ नहीं लगाएगा। उससे पहले उसकी गरीबी, मजबूरी और अनाथता को समझने की कोशिश करो। हमें समाज के गरीबों और अनाथों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।”
रहमत खान की यह बात सुनकर भीड़ चुपचाप सर झुकाए चली गई। गोपाल ने माफी मांगते हुए रहमत खान से लिपटकर कहा, “अंकल, मुझे माफ कर दीजिए।” रहमत खान ने गोपाल के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “चलो बेटा, मेरे साथ आओ। भविष्य में कभी ऐसी हरकत मत करना। अब तुम अनाथ नहीं हो, तुम्हारे चाचा रहमत खान अभी ज़िंदा हैं।”







