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चावल उत्पादन में भारत ने चीन को पछाड़ा; कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने राष्ट्र को समर्पित कीं 184 नई किस्में

कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने जारी कीं 184 नई किस्में

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नई दिल्ली | 

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को देश की कृषि व्यवस्था को लेकर दो बड़े ऐलान किए। उन्होंने बताया कि भारत अब खाद्य-कमी वाले देश से उबरकर दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बन गया है। एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए भारत ने चावल उत्पादन में पड़ोसी देश चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।

यह जानकारी श्री चौहान ने नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए दी। इस अवसर पर उन्होंने वैज्ञानिकों और अधिकारियों को स्पष्ट लक्ष्य देते हुए कहा, “रिसर्च तभी सार्थक है जब उसका फायदा समय पर खेतों तक पहुँचे। नई जारी की गई किस्में हर हाल में तीन साल के अंदर किसानों तक पहुँचनी चाहिए।”

चीन से आगे निकला भारत

कृषि मंत्री ने आंकड़ों के जरिए भारत की बढ़ती ताकत का अहसास कराया। उन्होंने कहा कि भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन है। इसके साथ ही भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और खाद्य आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है और किसान इस बदलाव के केन्द्र में हैं।

‘बीज खेती की आत्मा है’

अनुसंधान की अहमियत बताते हुए श्री चौहान ने कहा, “कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और खेती की आत्मा बीज है। अच्छे बीज ही उत्पादकता, पोषण और खाद्य सुरक्षा की नींव हैं।” उन्होंने जोर दिया कि अब लक्ष्य सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा है। सरकार दालों और तिलहनों पर विशेष ध्यान देते हुए उच्च गुणवत्ता वाली फसलें सुनिश्चित कर रही है। मंत्री ने बीज उत्पादन और प्रदर्शन में तेजी लाने के लिए केन्द्र, राज्य सरकारों, कृषि विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल का आह्वान किया।

बीते दशक में बदली तस्वीर: डॉ. जाट

कार्यक्रम में डेयर के सचिव एवं भाकृअनुप (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने बताया कि पिछले 4-5 दशकों के मुकाबले बीते एक दशक में सबसे ज्यादा नई किस्में विकसित की गई हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में क्लाइमेट रेजिलिएंस (जलवायु लचीलापन), बायोफोर्टिफिकेशन और प्राकृतिक खेती को ध्यान में रखकर किस्में तैयार की जाएंगी, जो अम्लीय और खारी मिट्टी जैसी चुनौतियों का भी सामना कर सकेंगी।

किसानों तक जल्द पहुंचेंगे बीज: देवेश चतुर्वेदी

कृषि मंत्रालय के सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘सीड मल्टिप्लिकेशन रेट’ (बीज गुणन दर) को 1.5 से 2 गुना बढ़ाया गया है। साथ ही बीज ट्रेसबिलिटी और निजी क्षेत्र के अनुसंधान को मान्यता देने से अब नई किस्में किसानों तक एक से दो साल पहले पहुंच सकेंगी। उन्होंने बताया कि 1969 से अब तक 7,205 किस्में अधिसूचित हुई हैं, जिनमें से 3,236 किस्में अकेले पिछले 11-12 सालों में आई हैं।

इन फसलों की नई किस्में मिलीं जारी की गई 184 किस्मों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • अनाज: 122 किस्में

  • कपास: 24 किस्में (22 बीटी कॉटन सहित)

  • तिलहन: 13 किस्में

  • चारा: 11 किस्में

  • अन्य: 6 गन्ना, 6 दालें, 1 जूट और 1 तंबाकू।

ये किस्में सूखा, लवणता, कीट-रोग प्रतिरोधी होने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के लिए भी उपयुक्त हैं।

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