टैरिफ युद्ध के बीच नरम पड़े ट्रंप
OM Darpan
Sep 05, 2025 11:19 pm
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05 Sep 2025
वॉशिंगटन।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ युद्ध के बीच भारत और रूस पर बड़ा बयान दिया है। चीन में हाल ही में संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के बाद उनके तेवर नरम पड़ते दिख रहे हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि लगता है हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है।
ट्रंप ने शेयर की तस्वीर, जताई चिंता
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ दिख रहे हैं। इस पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, 'लगता है कि हमने भारत और रूस को गहरे, अंधकारमय चीन के हाथों खो दिया है। ईश्वर करे कि उनका भविष्य लंबा और समृद्ध हो।' यह टिप्पणी तब आई है जब अमेरिका की तरफ से भारत पर टैरिफ लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है।
एससीओ समिट ने खींचा विश्व का ध्यान
ट्रंप की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले दिनों चीन के तिआनजिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नजदीकियों ने विश्व का ध्यान खींचा था। भारत-अमेरिका संबंधों में खटास तब और गहरी हो गई जब ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही रूस से कच्चा तेल खरीदने पर भी अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया गया था।विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
https://twitter.com/ANI/status/1963915640734970149 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस पोस्ट को लेकर जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उनके साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। जायसवाल ने कहा, 'इस समय इस पोस्ट पर मेरी कोई टिप्पणी नहीं है।'पूर्व अधिकारियों ने दी ट्रंप को नसीहत
इस बीच, कई पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत के साथ संबंध सुधारने की नसीहत दी है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जॉन बोल्टन ने कहा कि 'ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका-भारत संबंधों को दशकों पीछे धकेल दिया है, जिससे प्रधानमंत्री मोदी रूस और चीन के करीब चले गए हैं। बीजिंग ने खुद को अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के विकल्प के रूप में पेश किया है।' पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन और पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट एम. कैंपबेल ने एक लेख में लिखा कि अमेरिका और भारत के संबंध को दोनों ही दलों (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) का समर्थन मिला है और इन संबंधों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की मनमानी को भी रोका है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिका के साझेदारों को भारत को यह समझाने की कोशिश करनी चाहिए कि ट्रंप का व्यवहार अक्सर किसी समझौते की शुरुआत का संकेत होता है।
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