नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर रहा है। नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के इन नवाचारों की जानकारी साझा की।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के पांच जिले सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं। अभियान के पहले दो चरणों में छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर था, लेकिन तीसरे चरण में 79,775 जल संरचनाओं के साथ राज्य ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
कोरिया का ‘5 प्रतिशत मॉडल’ बना मिसाल
मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले के ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। इस पहल के तहत किसान अपनी कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण के लिए स्वेच्छा से दे रहे हैं। इसमें ऐसी संरचनाएं बनाई जा रही हैं जिससे बारिश का पानी खेत से बाहर जाने के बजाय वहीं जमीन के भीतर समाहित हो सके। इस मॉडल में किसान केवल लाभार्थी नहीं बल्कि सक्रिय भागीदार हैं।
JSJB के तीनों चरणों में रहा दबदबा
अभियान के प्रथम चरण (JSJB 1.0) में छत्तीसगढ़ में 4.05 लाख जल संरचनाएं बनाई गईं, जिसमें राज्य दूसरे स्थान पर रहा। दूसरे चरण (JSJB 2.0) में 24.07 लाख संरचनाएं दर्ज की गईं और राज्य ने फिर दूसरा स्थान पाया। अब तीसरे चरण (JSJB 3.0) में 77,719 संरचनाओं का कार्य पूर्ण कर छत्तीसगढ़ देश में पहले पायदान पर पहुंच गया है।
26 से घटकर 19 हुए डार्क ब्लॉक
राज्य में जल संरक्षण प्रयासों के कारण पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में सुझाव दिया कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू किए जाएं और प्रत्येक राज्य अपनी भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे।









