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गुजरात दौरे से लौटीं बिहान समूह की 17 दीदियों ने उपमुख्यमंत्री को सुनाए अपने अनुभव
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उन्नत पशुपालन तकनीक को छत्तीसगढ़ में लागू करने का लिया संकल्प
✍️ डिजिटल डेस्क
कवर्धा | कबीरधाम जिले के बिहान स्व-सहायता समूहों से जुड़ी दीदियों और पशुपालकों का गुजरात दौरा काफी प्रेरणादायी रहा। बनासकाठा स्थित डेयरी कोऑपरेटिव और अमूल डेयरी कोऑपरेटिव के शैक्षणिक भ्रमण से लौटने के बाद इन महिलाओं ने कवर्धा पहुंचकर उपमुख्यमंत्री और कवर्धा विधायक विजय शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान दीदियों ने उन्हें रक्षाबंधन की बधाई देते हुए राखी बांधी और गुजरात में सीखी गई नई तकनीकों की जानकारी साझा की।
गुजरात में देखा सफल डेयरी और सहकारी मॉडल
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से कबीरधाम जिले के 17 बिहान समूहों की दीदियों और 17 पशुपालकों को गुजरात भेजा गया था। दल ने वहां डेयरी कोऑपरेटिव और अमूल डेयरी कोऑपरेटिव की कार्यप्रणाली का बारीकी से अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने उन्नत पशुपालन तकनीक, संतुलित आहार, चारा विकास और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपायों को करीब से देखा। उन्होंने दुग्ध संकलन, प्रसंस्करण की आधुनिक व्यवस्था, दूध की गुणवत्ता जांच और डेयरी उत्पादों के विपणन की पूरी प्रक्रिया भी समझी।
कबीरधाम में लागू होगा गुजरात का फॉर्मूला
गुजरात से लौटीं दीदियों ने बताया कि वहां डेयरी गतिविधियों को सामूहिक आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। वे वहां सीखी गई प्रबंधन पद्धतियों को अन्य ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों के साथ साझा कर आजीविका के नए अवसर विकसित करेंगी। उपमुख्यमंत्री ने दीदियों से आह्वान किया कि वे बनासकाठा में देखी गई उन्नत व्यवस्थाओं को स्थानीय स्तर पर लागू करें।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि “शैक्षणिक भ्रमण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब वहां से मिली सीख को अपने गांव और जिले में अपनाकर आजीविका के नए अवसर तैयार किए जाएं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। गुजरात के सफल डेयरी मॉडल से प्राप्त अनुभव आने वाले समय में कबीरधाम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने में उपयोगी साबित होंगे।”
शर्मा ने आगे कहा कि बिहान समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। कबीरधाम की दीदियों का यह भ्रमण केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सीख को स्थानीय स्तर पर आजीविका में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।









