सुकमा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री व सुकमा जिला प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुदूर वनांचलों में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। सुकमा जिले के कोयाबेकुर और गोलाबेकुर क्षेत्र के किसानों का करीब चार दशक पुराना इंतजार अब खत्म हो गया है। वर्षों से बंद और जर्जर हो चुकी कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना की नहर का सफलतापूर्वक पुनर्जीवन कर खेतों तक पानी पहुंचा दिया गया है। इस महत्वपूर्ण पहल से क्षेत्र के 100 से अधिक किसानों को सिंचाई की सीधी सुविधा मिलेगी और करीब 160 हेक्टेयर भूमि में खेती को नया विस्तार मिलेगा।
1983 में बनी थी नहर, नक्सली साये में हुई जर्जर
कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना की शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव और नक्सल प्रभावित परिस्थितियों के कारण यह नहर धीरे-धीरे पूरी तरह जर्जर होकर बंद हो गई थी। इसके चलते दशकों तक किसान सिंचाई के लिए केवल बारिश पर निर्भर रहे या फिर महंगे बोरवेल के जरिए खेती करने को मजबूर थे। किसानों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में परियोजना के लिए 187.22 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद वर्ष 2024 से 2.74 किलोमीटर लंबी नहर में सीसी लाइनिंग और आधुनिक संरचनाओं का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू हुआ, जिसके सुखद परिणाम अब सामने आए हैं।
187 लाख से बदली तस्वीर, कलेक्टर ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचने पर कलेक्टर अमित कुमार ने इसे जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में इस लंबित परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया है। अब किसान खरीफ के साथ गर्मी के मौसम में भी नकदी फसलें ले सकेंगे। स्थानीय किसान संपत यादव ने बताया कि 1983 में जब नहर बनी थी तब वे बहुत छोटे थे, अब सालों बाद पानी आने से खेती की लागत कम होगी। वहीं किसान मुकेश सोढ़ी ने गोलाबेकुर नहर के पुनर्जीवन पर खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार जताया है। शासन अब इस नहर के और विस्तार की योजना पर भी काम कर रहा है।









