नई दिल्ली।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पुनर्गठित हिंदी सलाहकार समिति की पहली बैठक मंगलवार को इंदिरा पर्यावरण भवन के तीस्ता सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
बैठक में सांसद मिथलेश कुमार, माया नारोलिया और कमलेश जांगड़े सहित हिंदी के प्रतिष्ठित विद्वान और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने हिंदी को जन-जन तक पहुँचाने और इसे सरल बनाने पर जोर दिया।
भूपेंद्र यादव ने अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि बेहतर संपर्क का माध्यम है। उन्होंने सलाह दी कि सरकारी कामकाज में जटिल शब्दों के बजाय सरल हिंदी का प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि मंत्रालय की योजनाएं आम जनता आसानी से समझ सके। मंत्री ने एक विशेष पहल का आह्वान करते हुए कहा कि हस्ताक्षर व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिचायक होते हैं, इसलिए सभी को अपने हस्ताक्षर हिंदी में करने चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे कम से कम महीने में एक बार हिंदी में टिप्पणी (नोटिंग) लिखने की शुरुआत करें। बैठक में उपस्थित सांसदों और विद्वानों ने भी मंत्रालय के कार्यों में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अपने सुझाव साझा किए। अंत में मंत्रालय के सचिव ने विश्वास दिलाया कि प्राप्त सुझावों पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।









