बिश्केक | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को केवल कार्रवाई और प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
मोदी ने आतंकवाद को पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बताते हुए इसकी फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों समेत पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने अप्रत्यक्ष तौर पर चीन को भी दो टूक सुनाते हुए कहा कि सभी देशों की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान होना चाहिए।
कनेक्टिविटी एजेंडे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि मजबूत और विश्वसनीय कनेक्टिविटी साझा विकास का आधार है। भारत उन परियोजनाओं का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ें और व्यापार को आसान बनाएं, लेकिन ऐसी परियोजनाओं में क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य है।
गिलगित-बल्तिस्तान पर चीन को संदेश
प्रधानमंत्री का यह बयान चीन के ‘चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (सीपीईसी) के संदर्भ में देखा जा रहा है, जो गिलगित-बल्तिस्तान से गुजरता है। भारत इस क्षेत्र को अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है और इस पर लगातार आपत्ति जताता रहा है।
संगठन के तीसरे स्तंभ ‘अपॉर्चनिटी’ पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि एससीओ का लाभ सीधे युवाओं, उद्यमियों और किसानों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफलता का पैमाना केवल सरकारी बैठकें नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आया सुधार होना चाहिए।
युद्ध के मैदान में समाधान नहीं
पश्चिम एशिया संकट और अफगानिस्तान का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि तनाव का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। उन्होंने ड्रग तस्करी को क्षेत्रीय सुरक्षा और युवाओं के लिए गंभीर खतरा बताया।
विविधता ही हमारी पहचान
संबोधन के अंत में मोदी ने साहित्यकार चिंगिज़ ऐतमातोव के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों की विविधता उनकी पहचान है और साझा उद्देश्य ही संगठन की सबसे बड़ी ताकत है।








