
रायपुर।
रायपुर में चल रही बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा के तीसरे दिन एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुस्लिम और ईसाई परिवारों ने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाया। अवधपुरी मैदान, श्रीनगर रोड, गुढ़ियारी में आयोजित इस भव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बागेश्वर धाम में ‘घर वापसी’ का संकल्प
युवा समाजसेवी चंदन-बसंत अग्रवाल के नेतृत्व में स्व. पुरुषोत्तम अग्रवाल स्मृति फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस कथा के दौरान, कई परिवारों ने अपने पूर्वजों द्वारा अपनाए गए अन्य धर्मों को छोड़कर सनातन धर्म में वापसी का संकल्प लिया। यह घटनाक्रम छत्तीसगढ़ की राजधानी में चर्चा का विषय बन गया है।
सलमान ने छोड़ा इस्लाम, बने राजवीर
मुर्रा भट्टी निवासी सलमान ने श्री हनुमंत कथा के मंच पर सनातन धर्म अपनाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वह पहले भी पूजा-पाठ करते थे, लेकिन घरवाले मना करते थे। घर वापसी के कार्यक्रम को देखकर उन्होंने सनातन धर्म अपनाने का निर्णय लिया। पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें एफीडेविड बनाकर कलेक्टर को एक प्रति देने की सलाह दी। उन्हें गंगाजल पिलाकर और तिलक लगाकर सम्मानित किया गया, जिसके बाद शास्त्री ने मंत्रोच्चार कर सलमान को ‘राजवीर’ नाम दिया।
ईसाई परिवारों ने भी अपनाया सनातन
इसी कार्यक्रम में ओडिया बोलने वाले परिवार ने भी ईसाई धर्म छोड़कर वापस हिन्दू धर्म अपनाया। इस परिवार के पूर्वज (ससुर) ने हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था। पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उनसे पूछा कि क्या उन पर कोई जोर-जबरदस्ती की गई है, जिस पर उन्होंने अपनी मर्जी से घर वापसी की बात कही। सभी सदस्यों को तिलक व गंगाजल पिलाया गया और हनुमान जी की फोटो भेंट कर जोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत किया गया। इसके अतिरिक्त, श्रीमती निर्मला ने भी अपने परिवार के साथ ईसाई धर्म से सनातन में घर वापसी की।
कलाकारों का सम्मान

श्री हनुमंत कथा के तीसरे दिन दिव्य दरबार समाप्त होने के बाद, लोक कलाकार दिलीप षडंगी, कांता सरण और अरु साहू को मंच पर सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ी गायक दिलीप षडंगी ने ‘चंदवा बैगा’ गाना गाकर श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने अपने जीवन के इस पल को सौभाग्यशाली बताया और छत्तीसगढ़ के कलाकारों को दिए जा रहे सम्मान के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। बसंत अग्रवाल और पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मंच पर इन कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर परिवहन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, साजा विधायक ईश्वर साहू सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर के दिव्य संदेश
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हनुमंत कथा की शुरुआत गुढ़ियारी वाले हनुमान जी के जयकारे के साथ की। उन्होंने बताया कि दो साल बाद रायपुर में फिर से दिव्य दरबार लग रहा है, जो धर्म विरोधियों के लिए एक ‘तमाचा’ है। उन्होंने रायपुर को बजरंग बली की ऐसी भूमि बताया जहां उनका झंडा ऐसा गड़ा कि ‘हा ईल्ला हे वालों की ठटरी व गठरी बंध गई थी’। उन्होंने प्रेत बाधा से परेशान लोगों के लिए प्रेत राज सरकार के दरबार की घोषणा की, जो मंगलवार को लगेगा।
दिव्य दरबार के नियम और वचन
शास्त्री ने दिव्य दरबार में अर्जी लगाने वाले भक्तों को कुछ नियम बताए: लहसुन, मांस, मंदिरा का सेवन पूरी तरह बंद करना होगा; महीने, दो महीने या तीन महीने में बालाजी सरकार का दर्शन करना होगा; 11 और 21 पेशी करने का प्रण लेना होगा; सुबह 6 बजे आरती में पहुंचना होगा; और जब तक धाम न पहुंच पाएं, मंगलवार को ‘ऊँ बागेश्वराय’ मंत्र का जाप करना होगा। प्रेत-बाधा से परेशान होने पर प्रतिदिन या मंगलवार को सन्यासी बाबा का हवन करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि सपने में दो दिन तक बंदर दिखाई दें तो समझ जाना चाहिए कि अर्जी लग गई है और बालाजी की सेना आ गई है। उन्होंने धर्मांतरित हिंदुओं से घर वापसी का आह्वान करते हुए कहा कि दरबारों में भटकने या तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ने की आवश्यकता नहीं है, हनुमान जी के नाम से वह गारंटी लेते हैं।
तीन बालाजी स्वरूपों का महत्व
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि कलयुग में हनुमान जी तीन जगहों पर बालाजी के रूप में बैठे हैं: मेहंदीपुर बालाजी (बुढ़े बप्पा जी), सालासर बालाजी (मूंछों वाले जवान), और मध्यप्रदेश के छतरपुर गांव में स्थित बागेश्वर बालाजी (बाल हनुमान)। उन्होंने यह भी बताया कि बागेश्वर धाम में अब शनिवार को प्रेत राज सरकार का दरबार, मंगलवार को पुरानी पेशी का दरबार और गुरुवार को मंदिर में बालाजी की सेवा करते हुए भाभूति बांटी जाएगी। उन्होंने भक्तों से बागेश्वर धाम के निर्माण के लिए एक-एक ईंट का सहयोग भी मांगा।
भगवान को नचाना है तो माधव को चुनो: शास्त्री
अपने प्रवचन में शास्त्री ने माया और भक्ति के बीच का अंतर समझाया। उन्होंने कहा, “यदि तुम्हें खुद नाचना हो तो माया लो, अगर मुझे नचाना हो तो भक्ति लो। भगवान के भक्ति को प्राप्त करोगे तो परमात्मा तुम्हारे सामने नृत्य करेंगे, अगर तुम भगवान की माया को पाओगे तो तुम्हें संसार में नाचना पड़ेगा। खुद नाचना है तो माया को चुनो, अगर भगवान को नचाना है तो माधव को चुनो।” उन्होंने पत्नी की परिभाषा देते हुए कहा कि जो पति को पतन से बचाए वह है पत्नी। उन्होंने माताओं की बचत करने की आदत और भगवान के चरित्र देखने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
चरित्र को साफ करें, चित्र को नहीं
उन्होंने भक्तों से कहा, “मेरे पागलो भगवान के अलावा किसी के पीछे पागल मत होना। बुरा मत मानना आप फूट-फूटकर लोगों को अपना बनाओंगे तो आप कुछ नहीं पा सकते, यदि आप भगवान को अपना बना लोगे तो पूरी दुनिया को अपना बना लोगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि लोग अपने चित्र को साफ करने में लगे हैं, जबकि उन्हें अपने चरित्र को साफ करना चाहिए, क्योंकि भगवान चरित्र देखते हैं, चित्र नहीं। उन्होंने विचार बड़े रखने और व्यवहार बड़ा करने का संदेश भी दिया।






