दुर्ग।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम साबित होने जा रहा है। इस कानून से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। यह बातें लाभचंद बाफना ने इस अधिनियम का स्वागत करते हुए कहीं। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।
नीति-निर्धारण में मिलेगी मुख्य भूमिका
लाभचंद बाफना ने कहा कि अब तक महिलाओं को अक्सर राजनीति में केवल ‘वोट बैंक’ के रूप में देखा जाता था। लेकिन इस अधिनियम के लागू होने के बाद, उन्हें नीति-निर्धारण की मुख्यधारा में स्थान मिलेगा। महिलाओं की सोच, अनुभव और दृष्टिकोण सीधे तौर पर देश की नीतियों में परिलक्षित होंगे, जिससे भविष्य में अधिक समावेशी और संतुलित निर्णय लिए जा सकेंगे।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पूरी हुई राजनीतिक इच्छाशक्ति
विधेयक के इतिहास पर बात करते हुए बाफना ने बताया कि इसे लागू करने के लिए पहले भी कई बार प्रयास किए गए थे, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पाया। अब प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इसे संसद में प्रस्तुत कर पारित किया गया, जो देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जिससे देश की लगभग आधी आबादी को वास्तविक प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा।
2029 के चुनावों में दिखेगा व्यापक प्रभाव
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का उल्लेख करते हुए बाफना ने कहा कि यह अधिनियम उसी सोच का विस्तार है, जिसमें महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया है। आज महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए आगे आ रही हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2029 के चुनावों तक इस अधिनियम का व्यापक प्रभाव जमीनी स्तर पर देखने को मिलेगा। बड़ी संख्या में महिलाएं संसद और विधानसभाओं में पहुंचेंगी और देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगी। इससे राजनीति के स्वरूप में नई ऊर्जा, पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही आएगी।
बाफना ने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से समाज में जो सकारात्मक बदलाव आएगा, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगा और इससे लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।






