14 सितम्बर 2026 |
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उधर अमेरिका कर रहा था नाकेबंदी की तैयारी, इधर 7 साल बाद भारत की झोली में आ गिरा ईरान का सस्ता कच्चा तेल; जानें क्या है पूरा खेल

OM Darpan

Apr 13, 2026 07:19 pm 188 views
उधर अमेरिका कर रहा था नाकेबंदी की तैयारी, इधर 7 साल बाद भारत की झोली में आ गिरा ईरान का सस्ता कच्चा तेल; जानें क्या है पूरा खेल

नई दिल्ली (ओमदर्पण न्यूज़)।

अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर जारी भारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरान का कच्चा तेल एक बार फिर भारत पहुंच गया है। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ईरानी कच्चा तेल लेकर दो बड़े सुपरटैंकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तट पर सुरक्षित पहुंच चुके हैं।

गुजरात और ओडिशा तट पर पहुंचे 'फेलिसिटी' और 'जया'

जानकारी के अनुसार, नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी द्वारा संचालित 'फेलिसिटी' (Felicity) नामक एक विशाल क्रूड कैरियर रविवार देर रात गुजरात के सिका तट के पास पहुंचा। इस टैंकर में करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल है, जिसे मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से लोड किया गया था। वहीं, दूसरा टैंकर 'जया' (Jaya) ओडिशा के पारादीप तट के पास पहुंचा है। इसमें भी लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल है, जिसे फरवरी के अंत में खार्ग द्वीप से लोड किया गया था।

IOCL ने की पुष्टि, रिलायंस और BPCL का भी है हब

भारत पहुंचे इन कार्गो के खरीदारों की आधिकारिक सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, पारादीप पोर्ट का संचालन मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) करती है। IOCL ने पुष्टि की है कि उसने छूट के तहत कम से कम एक खेप की खरीदारी की है। दूसरी ओर, गुजरात का सिका क्षेत्र रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) के लिए एक प्रमुख क्रूड हैंडलिंग हब माना जाता है, जहां इन कंपनियों का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।

एक महीने की छूट का मिला फायदा

करीब सात साल बाद भारत पहुंचे ये ईरानी तेल के पहले कार्गो हैं। दरअसल, अमेरिका ने पिछले महीने कुछ शर्तों के साथ प्रतिबंधों में राहत दी थी। इस एक महीने की छूट के तहत समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल को बेचने की इजाजत दी गई थी, ताकि वैश्विक ईंधन सप्लाई प्रभावित न हो और कीमतें काबू में रहें।

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हालांकि, बीते शनिवार को पाकिस्तान में शांति वार्ता टूटने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा कर दी है, ताकि ईरान को तेल निर्यात से होने वाली आय को रोका जा सके। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) की घोषणा के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर भारतीय समयानुसार सोमवार रात 8:30 बजे से ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर दी जाएगी। यह नाकेबंदी अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाहों पर लागू होगी।

कभी भारत के तेल आयात में 11.5% थी ईरान की हिस्सेदारी

गौरतलब है कि वर्ष 2019 से पहले भारत ईरान से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदता था। भारतीय रिफाइनरियों के लिए अनुकूल होने के कारण ईरानी 'लाइट' और 'हेवी' ग्रेड की काफी मांग थी। वर्ष 2018 में भारत रोजाना करीब 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदता था। जनवरी से मई 2019 के बीच यह आंकड़ा घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया और फिर मई 2019 से प्रतिबंधों के चलते आयात पूरी तरह बंद हो गया था। उस समय भारत के कुल तेल आयात में ईरानी तेल की हिस्सेदारी 11.5 प्रतिशत तक हुआ करती थी।


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