कोरोना के बाद आयुर्वेद पर बढ़ा लोगों का भरोसा - 10 साल में AIIA पहुंचे 37.74 लाख मरीज
OM Darpan

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) ने गुरुवार को अपने स्थापना दिवस के अवसर पर बीते एक दशक की उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया। जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2016 से सितंबर 2026 के बीच संस्थान और इसके विभिन्न आउटरीच केंद्रों में करीब 37,74,524 मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं। यह भारी-भरकम आंकड़ा इस बात की गवाही दे रहा है कि देश में पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सा पर लोगों का विश्वास किस तेजी से मजबूत हुआ है।
कोविड-19 के बाद चार गुना बढ़े मरीज
संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति ने बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद से आयुर्वेद के प्रति लोगों की रुचि और स्वीकार्यता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसी का नतीजा है कि संस्थान में आने वाले मरीजों की संख्या में चार गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2020 में जहां लगभग 1.23 लाख मरीजों ने स्वास्थ्य सेवाएं ली थीं, वहीं सितंबर 2026 तक यह संख्या छलांग लगाकर 5.40 लाख के पार पहुंच गई है।
प्रतिदिन 3 हजार मरीजों की ओपीडी-क्षमता
रिपोर्ट के अनुसार, अकेले नई दिल्ली के सरिता विहार स्थित मुख्य परिसर में इस एक दशक के दौरान 30,37,077 मरीजों का उपचार किया गया है। मौजूदा समय में संस्थान के पास हर दिन लगभग 3,000 मरीजों को ओपीडी (OPD) सेवाएं उपलब्ध कराने का मजबूत बुनियादी ढांचा है। इसके अलावा गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए 200 बिस्तरों वाला इनडोर रोगी विभाग (IPD) भी लगातार सेवाएं दे रहा है।
दिल्ली से गोवा तक बढ़ा स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा
मुख्य परिसर के अलावा, AIIA ने अपनी पहुंच को आम जनमानस तक ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। गोवा स्थित सैटेलाइट सेंटर के साथ-साथ सफदरजंग अस्पताल, यूपीएससी भवन, झज्जर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, मसूरी स्थित आईएएस प्रशिक्षण केंद्र और एकता नगर (केवड़िया) के केंद्रों के माध्यम से लगभग 7.37 लाख मरीजों को आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ पहुंचाया गया है।
अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
गुरुवार को स्थापना दिवस के मुख्य कार्यक्रम में दशक भर की उपलब्धियों की रिपोर्ट जारी करने के साथ ही 'कौमारभृत्य-2026' (KAUMARACON-2026) का भी सफल आयोजन किया गया। आयुष मंत्रालय के अधीन यह स्वायत्त संस्थान न सिर्फ व्यापक जनसमुदाय तक अपनी पहुंच बना रहा है, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के जरिए भारतीय चिकित्सा पद्धति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी दिला रहा है।
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