9 अक्टूबर 2026 |
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

पोर्श कार हादसा: ब्लड सैंपल बदलने का खुलासा, डॉक्टरों पर गंभीर आरोप

शेयर करें

OM Darpan

Aug 10, 2024 03:06 pm 188 views
पोर्श कार हादसा: ब्लड सैंपल बदलने का खुलासा, डॉक्टरों पर गंभीर आरोप
[smartslider3 slider=6]

नाबालिग आरोपी और उसके दोस्तों का ब्लड सैंपल बदला गया, कोर्ट में मामला उजागर, सत्र अदालत कर रही जांच

    पुणे के कल्याणी नगर में मई 2024 में हुए पोर्श कार हादसे में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस हादसे में नशे में धुत 17 वर्षीय नाबालिग ने अपनी तेज रफ्तार पोर्श कार से मोटरसाइकिल पर सवार दो 24 वर्षीय आईटी पेशेवरों की जान ले ली थी। हादसे के बाद हुए कोर्ट केस में अब यह बात सामने आई है कि न केवल नाबालिग आरोपी का, बल्कि उसके साथ मौजूद दोस्तों का भी ब्लड सैंपल सासून अस्पताल में बदला गया था। यह सैंपल इसलिए बदला गया ताकि यह साबित किया जा सके कि हादसे के वक्त वे नशे में नहीं थे।
[smartslider3 slider=2]
सत्र अदालत में चल रही इस मामले की सुनवाई के दौरान, विशेष अभियोजक शिशिर हिरे ने यह आरोप लगाया कि इस कांड में सासून अस्पताल के दो डॉक्टर, डॉ. अजय तावरे और डॉ. श्रीहरि हलनोर, ने आरोपी के माता-पिता के कहने पर यह खेल खेला। इन डॉक्टरों ने 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेकर ब्लड सैंपल बदले, जिससे आरोपी और उसके दोस्तों को कानूनी सुरक्षा मिल सके। यह हादसा 19 मई को हुआ था, जब नाबालिग ने नशे की हालत में अपनी पोर्श कार को तेज गति से चलाते हुए मोटरसाइकिल को टक्कर मारी थी। इस टक्कर में मध्य प्रदेश से आए दो आईटी पेशेवरों की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे के बाद, आरोपी को हिरासत में लिया गया था, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उसे एक निरीक्षण गृह से रिहा कर दिया गया था। इस मामले में, सत्र अदालत ने नाबालिग के माता-पिता, विशाल और शिवानी अग्रवाल, साथ ही बिचौलिये अश्पक मकंदर और अमर गायकवाड़, और अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका की गहन जांच शुरू की है। अभियोजन पक्ष का मानना है कि यह सारा खेल आरोपी को बचाने के लिए रचा गया था। विशेष अभियोजक ने अदालत के सामने जोर दिया कि जमानत देने से मामले की जांच प्रभावित हो सकती है और आरोपी और उनके सहायक जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। इस खुलासे के बाद, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और सासून अस्पताल के खिलाफ आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना ने पुणे और पूरे महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी यह देखना बाकी है कि सत्र अदालत इस मामले में क्या फैसला करती है और आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, इस केस ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है और न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।
Tags

शेयर करें

विज्ञापन / Advertisement

Government Advertisement
261009193655276

विज्ञापन

Advertisement