26 सितम्बर 2026 |
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तीन बच्चों की हत्या केस में महिला बरी, हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

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OM Darpan

Sep 25, 2026 04:49 am 678 views
तीन बच्चों की हत्या केस में महिला बरी, हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रियंका और उसके कथित साथी आशीष की दोषसिद्धि रद्द की

अदालत ने कहा—अभियोजन उचित संदेह से परे अपराध साबित नहीं कर सका

प्रयागराज।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने तीन बच्चों की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाने वाली महिला प्रियंका को बरी कर दिया है। अदालत ने मामले में उसके कथित साथी और मृत बच्चों के पिता के छोटे भाई आशीष उर्फ डैनी की दोषसिद्धि भी रद्द कर दी। निचली अदालत ने प्रियंका को फांसी और आशीष को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की पीठ ने दोनों आरोपियों की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे उनका अपराध साबित करने में विफल रहा है।

अदालत ने आठ वर्षीय जीवित बचे बच्चे की गवाही पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि उसकी गवाही में ऐसे विरोधाभास हैं जिन्हें दूर नहीं किया जा सकता और उसमें स्पष्ट रूप से सिखाए गए बयान के संकेत दिखाई देते हैं।

सेंगुर नदी से मिले थे तीन बच्चों के शव

मामला तीन बच्चों माधव उर्फ गुंगा (6), आदित्य उर्फ टिल्ला (5) और मंगल (4) की मौत से जुड़ा है। तीनों के शव 27 जून 2024 को औरैया में सेंगुर नदी से बरामद किए गए थे।

प्राथमिकी के अनुसार, प्रियंका अपने कथित साथी आशीष के साथ अपने चारों बेटों को सुबह करीब पांच बजे सेंगुर नदी पर बने पुल पर ले गई थी। आरोप था कि दोनों अपने संबंध जारी रखने के लिए बच्चों से छुटकारा पाना चाहते थे।

आरोप लगाया गया था कि चारों बच्चों को डुबोने का प्रयास किया गया। इस घटना में सबसे बड़ा बेटा सोनू बच गया, जबकि अन्य तीन बच्चों की मौत हो गई।

जीवित बचे बेटे के बयान पर टिका था अहम हिस्सा

सोनू के अनुसार, एक ग्राम प्रधान उसे अपने घर ले गए थे, जहां उसने घटना की जानकारी दी। इसके बाद प्रधान ने पुलिस को सूचना दी।

सोनू ने यह भी बताया था कि प्राथमिकी दर्ज कराने वाला मनीष उसका चाचा है और उसने मनीष को घटना के बारे में बताया था। इसके बाद मनीष ने प्राथमिकी दर्ज कराई।

हालांकि, प्राथमिकी दर्ज कराने वाले मनीष का बयान इससे अलग था। उसने कहा कि बच्चों की मौत की जानकारी ग्राम प्रधान ने पुलिस को दी थी और उसे भी घटना की सूचना वहीं से मिली थी, न कि बच्चे से। मनीष ने यह भी कहा कि उसे यह नहीं पता था कि घटना की जानकारी देने वाला व्यक्ति कौन था।

हाई कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला किया रद्द

उच्च न्यायालय ने इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रियंका और आशीष की अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें आशीष को आजीवन कारावास और प्रियंका को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत फांसी की सजा सुनाई गई थी।

अदालत ने दोनों को बरी करते हुए निर्देश दिया कि यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।


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