युक्तियुक्तकरण नीति से शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव: फेडरेशन
दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रमुख राजेश चटर्जी और उप प्रमुख विष्णु सिंह राजपूत ने नई युक्तियुक्तकरण नीति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह नीति नई शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के विपरीत है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ेगा।
शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों को होगा नुकसान
फेडरेशन ने बताया कि प्राथमिक स्तर पर कक्षा 3 से 5 तक चार मुख्य विषयों की पढ़ाई के लिए न्यूनतम पांच शिक्षकों की आवश्यकता है। हालांकि, युक्तियुक्तकरण नीति के तहत अब एक प्रधान पाठक और एक शिक्षक ही उपलब्ध होंगे, जिससे छात्रों को विषय शिक्षक के माध्यम से उचित शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होगी।
मिडिल और हाई/हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी समान स्थिति है। मिडिल स्कूलों में छह विषय पढ़ाए जाते हैं और हाई/हायर सेकेंडरी में छात्रों को विषय के अनुसार शिक्षकों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में, इन स्कूलों के लिए शिक्षकों की संख्या में कटौती की जा रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
स्कूलों के बंद होने से रोजगार पर संकट
फेडरेशन का कहना है कि यह नीति लगभग 32,000 शिक्षकों की नौकरियों को खतरे में डाल रही है। साथ ही, स्कूल बंद होने से रसोइयों और अन्य स्टाफ के रोजगार पर भी असर पड़ेगा। छोटी संख्या वाले स्कूलों की बंदी से छात्रों को दूरस्थ स्कूलों में जाना पड़ेगा, जो प्राथमिक स्तर के छात्रों के लिए उपयुक्त नहीं है।
नीति में विद्यार्थियों और शिक्षकों की जरूरतें अनदेखी
फेडरेशन ने आरोप लगाया कि नीति में शिक्षकों और विद्यार्थियों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है। एक ही परिसर में संचालित विभिन्न स्कूलों के समायोजन से आर्थिक और सामाजिक दुष्प्रभावों की संभावना है।









