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कलम बंद-काम बंद: इंद्रावती भवन से लेकर स्कूलों तक पसरा सन्नाटा

कलम बंद काम बंद आंदोलन

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  • 11 सूत्रीय मांगों पर आर-पार के मूड में कर्मचारी

रायपुर |

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 29 से 31 दिसंबर तक घोषित ‘कलम बंद-काम बंद’ आंदोलन का आज प्रदेश में व्यापक और जबरदस्त असर देखने को मिला। इंद्रावती भवन समेत नवा रायपुर के तमाम विभागाध्यक्ष कार्यालयों, निगम-मंडलों और बोर्ड ऑफिसों में सन्नाटा पसरा रहा। हालात यह थे कि आंदोलन के चलते वरिष्ठ अधिकारियों को अपने दफ्तरों तक पहुँचने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ा।

स्कूलों में ताले, दफ्तरों में वीरानी

हड़ताल का असर न केवल प्रशासनिक भवनों में बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी दिखा। प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में ताले लटके रहे और विश्वविद्यालयों के शिक्षक व कर्मचारियों ने भी अवकाश लेकर आंदोलन को समर्थन दिया। नगरीय निकायों का कामकाज भी पूरी तरह प्रभावित रहा। कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया।

रायपुर से सरगुजा और बस्तर तक आंदोलन की आग

फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा और संभाग प्रभारी चंद्रशेखर तिवारी के मार्गदर्शन में राजधानी रायपुर में कर्मचारियों का बड़ा हुजूम उमड़ा। यहाँ जिला संयोजक पीतांबर पटेल, नवा रायपुर विभागाध्यक्ष कार्यालय के अध्यक्ष जयकुमार साहू और नवा रायपुर संयोजक संतोष कुमार वर्मा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।

प्रदेश के अन्य जिलों में भी नेतृत्वकर्ताओं ने  संभाली कमान:

  • रायपुर संभाग: महासमुंद में टेकराम सेन, धमतरी में चंदूलाल चंद्राकर, गरियाबंद में एम. आर. खान और बलौदाबाजार में एल. एस. ध्रुव के नेतृत्व में “अब नई सहिबो, मोदी के गारंटी लेकर रहीबो” के नारे गूंजे।

  • दुर्ग संभाग: संभाग प्रभारी राजेश चटर्जी के मार्गदर्शन और जिला संयोजक विजय लहरे के नेतृत्व में दुर्ग में, तथा राजनांदगांव में सतीश व्यौहारे, बालोद में लोकेश साहू, बेमेतरा में अश्वनी बनर्जी, कबीरधाम में अर्जुन चंद्रवंशी और मानपुर-मोहला में ओ. पी. माहला के नेतृत्व में विशाल रैलियां निकाली गईं।

  • बिलासपुर संभाग: यहाँ संभाग प्रभारी जी. आर. चंद्रारोहित तिवारी के मार्गदर्शन और जिला संयोजक डॉ. बी. पी. सोनी के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। जांजगीर-चांपा में विश्वनाथ परिहार, कोरबा में के. आर. डहरिया, मुंगेली में जे. एस. ध्रुव, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में डॉ. संजय शर्मा, रायगढ़ में आशीष रंगारी और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में फकीरा यादव ने मोर्चा संभाला।

  • बस्तर संभाग: संभाग प्रभारी कैलाश चौहानटार्जन गुप्ता के मार्गदर्शन और जिला संयोजक गजेंद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में जगदलपुर में उग्र प्रदर्शन हुआ। कांकेर में प्रमोद तिवारी, कोंडागांव में शिवराज सिंह ठाकुर, नारायणपुर में डॉ. दीपेश रावतें, बीजापुर में के. डी. राव, दंतेवाड़ा में अरविंद यादव और सुकमा में विनायक साहू के नेतृत्व में रैलियां हुईं।

  • सरगुजा संभाग: संभाग प्रभारी ओंकार सिंहनृपेंद्र सिंह के मार्गदर्शन और अंबिकापुर जिला संयोजक कमलेश सोनी के नेतृत्व में कर्मचारियों का जमावड़ा लगा। सूरजपुर में डॉ. आर. एस. सिंह, कोरिया में डॉ. आर. एस. चांदे, बलरामपुर में डॉ. दीपेश रावटे, जशपुर में संतोष कुमार तांडे और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में गोपाल सिंह ने ज्ञापन सौंपा।

ये हैं प्रमुख 11 मांगें

  • फेडरेशन की मुख्य मांगों में केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (DA),

  • एरियर्स का GPF में समायोजन

  • चार स्तरीय समयमान वेतनमान

  • पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करना, 

  • शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ

  • सहायक शिक्षकों/पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान

  • अनुकंपा नियुक्ति में 10% सीलिंग में शिथिलीकरण

  • कैशलेस उपचार

  • पंचायत सचिवों का शासकीयकरण

  • 300 दिन का अवकाश नगदीकरण

  • अनियमित/संविदा का नियमितीकरण और सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करना शामिल है।

सरकार से आर-पार की लड़ाई के संकेत

फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सार्थक संवाद नहीं किया, तो फेडरेशन अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा करने के लिए बाध्य होगा।

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