-
दो हजार सत्ताइस के विधानसभा चुनाव से पहले बदले समीकरण
-
सतीश पूनिया को मिली डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी
चंडीगढ़ | पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से राज्य में अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही थी और दो हजार सत्ताइस के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में जुटी थी। अब अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन की चर्चा से पार्टी के सामने अपनी ही तैयारियों और नेताओं को नए समीकरण के लिए तैयार करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच गठबंधन को लेकर सकारात्मक माहौल बनाने पर विशेष जोर दिया है। पार्टी पर्यवेक्षक सतीश पूनिया को नाराज नेताओं को मनाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को दिल्ली बुलाकर सभी नेताओं को साथ लेकर चलने और संभावित बगावत रोकने का कड़ा संदेश दिया गया है।
[ सीटों के बंटवारे और संगठनात्मक असंतोष ने बढ़ाई पार्टी की चिंता ]
भारतीय जनता पार्टी के कई नेता लंबे समय से अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। ऐसे में गठबंधन होने पर उन्हें यह समझाना नेतृत्व के लिए मुश्किल होगा कि जिन सीटों पर उन्होंने संगठन खड़ा करने के लिए मेहनत की है, उनमें से कुछ सीटें अकाली दल के लिए क्यों छोड़ी जाएं। पार्टी के भीतर संगठनात्मक असंतोष भी चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में छह जिलाध्यक्षों को नियुक्ति के महज बारह दिनों के भीतर पद से हटा दिया गया था। इसके अलावा युवा मोर्चा के अध्यक्ष अनुज खोसला की नियुक्ति को लेकर भी कुछ नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई थी। पूर्व मंत्री तीक्ष्ण सूद ने भी इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर की थी। भाजपा के लिए अब अकाली दल से गठबंधन का फैसला केवल सीटों के बंटवारे तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पार्टी के भीतर सभी धड़ों को साथ रखना भी एक अग्निपरीक्षा साबित होगा।









