एक मोटर-साइकिल और आइस बॉक्स ने कैसे बदल दिया rakesh का कारोबार
OM Darpan
रोज दो क्विंटल मछली बेच रहे राकेश, महीने में 50 हजार तक शुद्ध कमाई
मोटर-साइकिल और आइस बॉक्स से दूर के हाट-बाजारों तक पहुंचा कारोबार
महासमुंद। ग्राम तुमगांव के (rakesh) राकेश धीवर का मछली व्यवसाय अब प्रतिमाह करीब 45 से 50 हजार रुपए की शुद्ध आमदनी दे रहा है। मत्स्य विभाग की मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना का लाभ मिलने के बाद वे आसपास के दूरस्थ गांवों और हाट-बाजारों तक मछली पहुंचा पा रहे हैं। इससे उनके कारोबार का दायरा बढ़ा है।
राकेश धीवर प्रतिदिन आसपास के तालाबों से मछलियां खरीदकर स्थानीय हाट-बाजारों में बेचते हैं। वर्तमान में उनका रोज का कारोबार करीब दो क्विंटल मछली का है। इसमें लगभग 20 हजार रुपए प्रतिदिन की लागत आती है, जबकि बिक्री से करीब 24 हजार रुपए तक की आय होती है।
इस तरह उन्हें प्रतिदिन करीब चार हजार रुपए का सकल लाभ मिलता है। मजदूरी और अन्य जरूरी खर्च घटाने के बाद रोज की शुद्ध आय करीब एक हजार से 1,500 रुपए तक रहती है। इसी आधार पर उनकी मासिक शुद्ध आमदनी लगभग 45 से 50 हजार रुपए तक पहुंच रही है।
राकेश धीवर मछली व्यवसाय से लंबे समय से जुड़े परिवार से आते हैं। उनके पिता विश्राम धीवर प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति तुमगांव के सदस्य रहे हैं और परिवार में मछली पालन व बिक्री आजीविका का हिस्सा रहा है। पिता से प्रेरित होकर राकेश ने भी इसी काम को अपनाया।
मत्स्य विभाग की मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना के तहत राकेश को मोटर-साइकिल और आइस बॉक्स मिला। इससे मछलियों को सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना आसान हुआ। साथ ही वे पहले की तुलना में अधिक दूरी के बाजारों और ग्राहकों तक पहुंच पा रहे हैं।
अब यह काम राकेश तक सीमित नहीं है। उनकी पत्नी और दो पुत्र भी मछली बिक्री में सहयोग करते हैं। परिवार के साथ मिलकर वे कारोबार का संचालन कर रहे हैं। मछली व्यवसाय के अलावा राकेश अपने पैतृक खेत में कृषि कार्य भी करते हैं। इस तरह कृषि और मत्स्य व्यवसाय उनकी आजीविका के दो स्रोत बने हुए हैं।
राकेश धीवर से जुड़ी यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के संदर्भ में साझा की गई सामग्री में जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी के उदाहरण के रूप में दी गई है।
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