30 सितम्बर 2026 |
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नई शिक्षा नीति से भारत में लौटी गुरुकुल परंपरा, गुलामी ने हमारी संस्कृति को पहुंचाया था नुकसान: सांसद बघेल

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OM Darpan

Nov 22, 2025 07:53 am 287 views
नई शिक्षा नीति से भारत में लौटी गुरुकुल परंपरा, गुलामी ने हमारी संस्कृति को पहुंचाया था नुकसान: सांसद बघेल

  • सांस्कृतिक कॉलेज खपरी में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा’ पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वार्ता संपन्न

  • जैविक खेती के गुर भी सिखाए

दुर्ग/धमधा (रोहितास सिंह भुवाल)।

दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक स्थित ग्राम खपरी के सांस्कृतिक कॉलेज में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक शिक्षा के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए दुर्ग सांसद विजय बघेल ने कहा कि भारत संतों, साधुओं और सनातन परंपराओं का देश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुलामी के दौर में भारत की गुरुकुल परंपरा को जानबूझकर समाप्त किया गया था, लेकिन अब नई शिक्षा नीति के जरिए इसे पुनर्जीवित किया जा रहा है।

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अंग्रेजी शिक्षा ने संस्कारों को किया चोटिल

सांसद बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि गुलामी के समय भारतीयों को अंग्रेजी शिक्षा पद्धति अपनाने के लिए विवश किया गया, जिससे देश की संस्कृति और शिक्षा को गंभीर क्षति पहुंची। उन्होंने कहा, "भारत अपनी महान संस्कृति और संस्कारों के साथ नए युग की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में बड़े स्तर पर सुधार किए गए हैं। नया भारतीय पाठ्यक्रम भारतीयता के मूल्यों को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।"

प्राचीन ज्ञान और आधुनिकता के बीच सेतु जरूरी

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली से आईं डॉ. ज्योति शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच सेतु का निर्माण ही नए भारत के निर्माण का मूल आधार है। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन और छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना के साथ हुआ।

वार्ता में देव संस्कृति प्रतिनिधि प्रशांत श्रीवास्तव, दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हेमचंद यादव, जूलॉजी विभाग से सारिका शर्मा, निदेशक ज्योति दुबे और हेड ममता दुबे सहित कई शिक्षाविद और शोधार्थी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लुत्फ और जैविक खेती का प्रदर्शन

आयोजन के दौरान पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्टॉल लगाया गया, जिसकी सांसद ने सराहना की। इसके अलावा, कार्यक्रम में विज्ञान और कृषि का अनूठा संगम भी देखने को मिला। यहां चाय की पत्तियों से तैयार प्राकृतिक खाद और पौधों में होने वाले फंगस रोगों के प्राकृतिक नियंत्रण के उपाय बताए गए। विशेषज्ञों ने इसे रासायनिक दवाओं की तुलना में सस्ता और सुरक्षित विकल्प बताया। कार्यक्रम के अंत में निदेशक डॉ. ज्योति शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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