एक शताब्दी बाद भी ‘घरवापसी’ और सांस्कृतिक जागरण की आवश्यकता प्रासंगिक: प्रबल प्रताप सिंह जूदेव
OM Darpan


पुडुचेरी साहित्य उत्सव के प्रतिष्ठित मंच पर ‘शुद्धि आंदोलन’ पर विमर्श;
छत्तीसगढ़ भाजपा उपाध्यक्ष ने धर्म स्वतंत्रता विधेयक को बताया सनातन संस्कृति के संरक्षण का ऐतिहासिक कदम
जशपुर। प्रतिष्ठित पुडुचेरी साहित्य उत्सव (Pondy Lit Fest 2026) में “शुद्धि मूवमेंट एट 100: इज़ दैट इनफ?” (Shuddhi Movement at 100: Is That Enough?) विषय पर गहन और तथ्याधारित संवाद हुआ। इस सत्र में छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। सत्र में उनके साथ जानी-मानी पत्रकार एवं लेखिका स्वाति गोयल शर्मा भी सहभागी रहीं। जूदेव ने कहा कि आज एक सदी बाद भी शुद्धि आंदोलन की विरासत पर विमर्श, घरवापसी और सांस्कृतिक जागरण की आवश्यकता पूरी तरह से प्रासंगिक है।
स्वामी श्रद्धानंद जी के योगदान को किया स्मरण
सत्र को संबोधित करते हुए जूदेव ने शुद्धि आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तक स्वामी श्रद्धानंद जी को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने शुद्धि आंदोलन को संगठित और व्यापक स्वरूप देकर समाज को अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया था। श्री जूदेव ने जोर देकर कहा कि इस आंदोलन ने भारत की सांस्कृतिक चेतना, परंपराओं और पहचान को जीवंत बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। इसे केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक इतिहास और सांस्कृतिक चेतना के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में समझा जाना चाहिए।
स्व. दिलीप सिंह जूदेव की विरासत और ‘घरवापसी’ का संकल्प
जूदेव ने 'घरवापसी' को अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ने की स्वाभाविक प्रक्रिया बताया। अपने पिता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी की विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के बीच सामाजिक जागरण और घरवापसी का कार्य उनके लिए एक सतत संकल्प है। जनजातीय व दूरस्थ क्षेत्रों में सामाजिक जागरण, संवाद और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना उनके निरंतर प्रयासों का एक अहम हिस्सा है।
धर्मांतरण के खिलाफ कानून व बस्तर के विकास पर जोर
छत्तीसगढ़ की श्री विष्णुदेव साय सरकार द्वारा विधानसभा में पारित ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026’ की सराहना करते हुए श्री जूदेव ने इसे एक महत्वपूर्ण विधायी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह जबरन, प्रलोभन या धोखे से होने वाले धर्मांतरण के विरुद्ध एक कड़ा प्रहार है और सनातन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का शानदार उदाहरण है। इसके साथ ही, उन्होंने बस्तर में नक्सल हिंसा में आई कमी का उल्लेख करते हुए कहा कि अब शांति और स्थिरता के वातावरण में जनजातीय समाज के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आधारभूत सुविधाओं और आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति देने की आवश्यकता है। उन्होंने विकास के साथ-साथ बस्तर की संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय पहचान के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया।
जूदेव ने पुडुचेरी साहित्य उत्सव को देश के महत्वपूर्ण साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक मंचों में से एक बताते हुए कार्यक्रम की मुख्य कर्ताधर्ता एवं आयोजक आलो पाल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में श्रीमती निर्मला सीतारमण, बी.एल. संतोष, प्रो. आनंद रंगनाथन और पूर्व (R&AW) प्रमुख विक्रम सूद सहित अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों की सहभागिता रही। श्री जूदेव ने कहा कि ऐसे गरिमामयी मंच पर शुद्धि आंदोलन, घरवापसी और भारत की सांस्कृतिक चेतना जैसे विषयों पर संवाद होना अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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