6 अक्टूबर 2026 |
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

AI इंजीनियर अतुल सुभाष आत्महत्या मामला: पत्नी और ससुराल वालों की हुई गिरफ्तारी

शेयर करें

OM Darpan

Dec 16, 2024 07:42 pm 321 views
AI इंजीनियर अतुल सुभाष आत्महत्या मामला: पत्नी और ससुराल वालों की हुई गिरफ्तारी
  बेंगलुरु। बेंगलुरु में काम करने वाले AI इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। रविवार को बेंगलुरु पुलिस ने अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया, उनकी सास निशा सिंघानिया और साले अनुराग सिंघानिया को गिरफ्तार कर लिया। अतुल ने अपनी आत्महत्या के लिए अपनी पत्नी और ससुराल वालों को जिम्मेदार ठहराया था। अतुल सुभाष ने 9 दिसंबर को आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने अपनी मौत से पहले डेढ़ घंटे का वीडियो और 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि निकिता और उसके परिवार ने उन्हें लगातार पैसे की मांग और शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाया।
अतुल ने लगाए थे आरोप ? अतुल और निकिता की शादी 2019 में हुई थी, लेकिन शादी के एक साल बाद दोनों अलग-अलग रह रहे थे। सुसाइड नोट में अतुल ने कहा था कि निकिता ने पहले एक करोड़ रुपये का सेटलमेंट मांगा था, जो बाद में बढ़ाकर तीन करोड़ रुपये कर दिया था। साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निकिता ने नाबालिग बेटे के नाम पर केस दायर कर 2 लाख रुपये का गुजारा भत्ता मांगने का दबाव बनाया था।
अतुल ने यह भी बताया कि निकिता और उसके परिवार ने उन पर घरेलू हिंसा, हत्या और दहेज प्रताड़ना समेत नौ मामले दर्ज करवा दिए थे, जिससे उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई थी।
पुलिस ने की कार्रवाई अतुल के वीडियो और सुसाइड नोट के आधार पर बेंगलुरु पुलिस ने निकिता और उसके परिवार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (IPC) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 3(5) के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने निकिता को गुरुग्राम से, जबकि उनकी सास निशा और साले अनुराग को यूपी के प्रयागराज से गिरफ्तार किया। तीनों को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट का रुख अतुल के मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रताड़ना को आत्महत्या के लिए उकसाना माना जा सकता है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के मामलों पर अहम टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप तभी सही होते हैं जब पुख्ता सबूत मौजूद हों। केवल प्रताड़ना के आरोप पर किसी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
पुलिस की जारी जांच का इंतजार अब बेंगलुरु पुलिस की जांच यह तय करेगी कि क्या निकिता व उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोप कितने सही हैं. क्या यह मामला आत्महत्या के लिए उकसाने का है।
Tags

शेयर करें

विज्ञापन / Advertisement

Government Advertisement
261006172008512

विज्ञापन

Advertisement